जबलपुर। कटनी की निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एफआईआर निरस्त कराने और अग्रिम जमानत की मांग को लेकर दायर उनकी याचिकाओं पर गुरुवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान शिकायतकर्ता आकाश लोधी की ओर से मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग वाली याचिका का हवाला देते हुए दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई का आग्रह किया गया। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस राम कुमार चौबे की युगलपीठ ने आग्रह स्वीकार करते हुए दोनों याचिकाओं पर 12 अक्टूबर को एक साथ सुनवाई करने का आदेश दिया। फिलहाल नेहा पच्चीसिया को अग्रिम जमानत मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
चालान पेश नहीं होने से जुड़ा है मामला
मामला कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज धोखाधड़ी सहित अन्य आरोपों से जुड़ा है। पुलिस ने सीएसपी नेहा पच्चीसिया सहित तीन आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि हत्या के एक मामले में निर्धारित समयसीमा के भीतर चालान पेश नहीं होने के कारण आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का लाभ मिल गया था। इसके बाद कथित तौर पर संबंधित आरोपियों की भूमिका और जमीन के लेन-देन की जांच शुरू हुई।
पुलिस ने तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। नेहा पच्चीसिया की ओर से एफआईआर निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया गया है। उन्होंने गिरफ्तारी से राहत की मांग भी की है।
एक करोड़ की जमीन 15 से 20 लाख में खरीदने का आरोप
शिकायत के अनुसार, करीब एक करोड़ रुपये मूल्य की जमीन कथित तौर पर महज 15 से 20 लाख रुपये में खरीदी गई। आरोप है कि जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम पर ली गई और खरीद से पहले उनके बैंक खाते में केवल कुछ हजार रुपये थे। शिकायत में क्षितिज राज पात्रे की ओर से खाते में रकम हस्तांतरित किए जाने का भी उल्लेख है। इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है।
एसआईटी की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
शिकायतकर्ता आकाश लोधी ने हाईकोर्ट में कहा कि इनाम घोषित होने के बावजूद विशेष जांच दल (एसआईटी) अब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पाया है। उन्होंने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है। इस संबंध में दायर याचिका पर भी अब नेहा पच्चीसिया की याचिकाओं के साथ सुनवाई होगी।
मामले में पहले हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा जोड़े जाने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद संबंधित पीठ ने सुनवाई से अलग होने का निर्णय लिया था। अब 12 अक्टूबर की सुनवाई में आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।


