भोपाल। मध्यप्रदेश से राज्यसभा की रिक्त सीट के लिए हो रहे उपचुनाव में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की निर्विरोध जीत का रास्ता लगभग साफ हो गया है। मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा ने पुरी के नामांकन को वैध घोषित कर स्वीकार कर लिया। उनके नामांकन पर तीन लोगों की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों को भी खारिज कर दिया गया। अब पांच नवंबर को नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद उनके निर्विरोध निर्वाचित होने की औपचारिकता शेष रह जाएगी।
दरअसल, हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। मंगलवार दोपहर दो बजे नामांकन पत्रों की जांच हुई। इस दौरान कांते सयन्ना, कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे और राजकुमार लोहानी ने पुरी के नामांकन पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं। आपत्तिकर्ताओं ने उनके शपथपत्र (फॉर्म-26) को अधूरा और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होने का आरोप लगाया था।
रिटर्निंग ऑफिसर ने आपत्तिकर्ताओं और उम्मीदवार दोनों का पक्ष सुनने के बाद दस्तावेजों की जांच की। आदेश में कहा गया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33 और 34 के अनिवार्य प्रावधानों का उल्लंघन नहीं हुआ है। धारा 36 के तहत नामांकन निरस्त करने का भी कोई आधार नहीं मिला। फॉर्म-26 को नियमानुसार और पूर्ण मानते हुए तीनों आपत्तियां खारिज कर दी गईं।
शपथपत्र में इन बिंदुओं पर उठे सवाल
कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने चुनाव प्रक्रिया और पुरी के दस्तावेजों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि शपथपत्र पर ‘अटेस्टेड’ लिखा होना निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा शपथपत्र में पत्नी का नाम नहीं होने और संपत्ति का ब्योरा अमेरिकी डॉलर तथा स्विस फ्रैंक जैसी विदेशी मुद्राओं में देने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। कटारे के मुताबिक, इन कमियों के आधार पर नामांकन निरस्त किया जाना चाहिए था।
लोहानी ने लगाया भेदभाव का आरोप
कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार लोहानी का नामांकन फॉर्म-26 निर्धारित तरीके से जमा नहीं करने के कारण खारिज कर दिया गया। लोहानी का कहना है कि उन्होंने दस्तावेज ई-मेल से भेजे थे, लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। उनका आरोप है कि अतिरिक्त समय मांगने के बावजूद अनुमति नहीं दी गई, जबकि हरदीप पुरी को आपत्तियों पर अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिला। इसी आधार पर उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।
अदालत जाने की तैयारी में कांग्रेस
हेमंत कटारे और कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने कहा कि वे निर्वाचन अधिकारी के फैसले के खिलाफ न्यायालय जाएंगे। कटारे ने कहा कि उनके पास कथित अनियमितताओं से जुड़े प्रमाण हैं। कांग्रेस का कहना है कि सभी उम्मीदवारों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। पार्टी इस मामले को चुनाव आयोग के साथ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
इस तरह हरदीप सिंह पुरी का नामांकन वैध होने के बाद उपचुनाव में उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन नामांकन प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने कानूनी लड़ाई के संकेत देकर मामले को राजनीतिक और न्यायिक विवाद का रूप दे दिया है।


