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    MP Police Action Plan 2026: तीन साल में ‘ड्रग फ्री मध्यप्रदेश’ का लक्ष्य, 15 जुलाई से चलेगा नशा मुक्ति अभियान 2.0

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    भोपाल। मप्र पुलिस ने अगले तीन वर्षों में प्रदेश को ‘ड्रग फ्री मध्यप्रदेश’ बनाने का बड़ा लक्ष्य तय किया है। इसी दिशा में 15 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक पूरे प्रदेश में ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान चलाया जाएगा। यह निर्णय भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक एवं विशेष सशस्त्र बल (विसबल) जोनों की दो दिवसीय त्रैमासिक समीक्षा बैठक में लिया गया।

    बैठक की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा ने की। उन्होंने अपराध नियंत्रण, प्रशासनिक सुधार, न्यायालयीन मामलों के त्वरित निराकरण और तकनीक आधारित पुलिसिंग को मजबूत बनाने के निर्देश दिए। डीजीपी ने कहा कि जिस प्रकार मध्यप्रदेश नक्सल समस्या से मुक्त हुआ है, उसी तरह आने वाले तीन वर्षों में राज्य को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा।

    बैठक में शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को चरणबद्ध तरीके से ‘ड्रग फ्री जोन’ बनाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।एनडीपीएस एक्ट के तहत चल रही कार्रवाइयों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि पिछले छह महीनों में 10 महत्वपूर्ण मामलों में लगभग 53 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति फ्रीज की गई है।

    पुलिस आधुनिकीकरण को लेकर डीजीपी ने प्रदेश में सीसीटीवी नेटवर्क को और मजबूत करने के निर्देश दिए। सेफगार्ड योजना के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित करीब एक लाख कैमरों का नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिसका उपयोग अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में किया जाएगा। नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में भी सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार प्राथमिकता से किया जाएगा।

    डीजीपी मकवाणा ने लंबित न्यायालयीन प्रकरणों, अवमानना याचिकाओं, सेवा संबंधी मामलों और रिट याचिकाओं की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। साथ ही ई-ऑफिस प्रणाली का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने और विभागीय जांचों के त्वरित निपटारे पर जोर दिया।

    बैठक में महिलाओं के विरुद्ध अपराध, हत्या, डकैती, हत्या के प्रयास और मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं का जोनवार एवं जिलावार विश्लेषण भी किया गया। पुलिस अधिकारियों को अपराध नियंत्रण के लिए प्रभावी रणनीति अपनाने और तकनीकी संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए गए।

    इसके अलावा पुलिस आवास योजना, प्रशासनिक भवनों के निर्माण, वाहनों की खरीद, प्रशिक्षण कार्यक्रम, मानव संसाधन प्रबंधन तथा सीएम हेल्पलाइन के लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। डीजीपी ने स्पष्ट कहा कि सुशासन, जवाबदेही और तकनीक आधारित प्रभावी पुलिसिंग ही मप्र पुलिस की प्राथमिकता होगी।

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