भोपाल। MP OBC Reservation: मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण का कानूनी विवाद एक बार फिर सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए परेशानी का कारण बन गया है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद सात हजार से अधिक पदों पर भर्ती के परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। पटवारी, वनरक्षक, जेल प्रहरी और सहायक उपनिरीक्षक (कंप्यूटर) समेत छह भर्ती परीक्षाओं के परिणामों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कर्मचारी चयन मंडल अब सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन मांग रहा है, ताकि आरक्षण के प्रावधानों के अनुरूप चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।
हाई कोर्ट के फैसले से बदलेगा भर्ती का गणित
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के वर्ष 2019 के फैसले को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। जबलपुर हाई कोर्ट के हालिया फैसले में अतिरिक्त 13 प्रतिशत आरक्षण को अवैधानिक ठहराए जाने के बाद भर्ती प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
अब कर्मचारी चयन मंडल के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना है कि लंबित परीक्षाओं के परिणाम किस आरक्षण व्यवस्था के तहत जारी किए जाएं। पहले विवादित 13 प्रतिशत पदों के परिणाम रोककर शेष पदों पर चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी। लेकिन ताजा फैसले के बाद इस व्यवस्था में बदलाव की संभावना बन गई है।
14 प्रतिशत आरक्षण पर रिजल्ट या 13 प्रतिशत पदों पर अलग फैसला
भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सबसे अहम सवाल का जवाब अभी स्पष्ट नहीं है। क्या परिणाम 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के आधार पर घोषित किए जाएंगे या पहले की तरह विवादित 13 प्रतिशत पदों को अलग रखकर चयन प्रक्रिया पूरी होगी? फैसले के बाद रोके गए पदों को अनारक्षित श्रेणी में शामिल करने और भर्ती आगे बढ़ाने के विकल्प पर भी स्पष्टता जरूरी है।
आरक्षण का फार्मूला तय होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विभिन्न परीक्षाओं में चयन सूची किस तरह तैयार की जाएगी। अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाओं की स्थिति और उन पर लागू कानूनी निर्देशों के कारण कर्मचारी चयन मंडल प्रशासनिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट कराना चाहता है।
पटवारी, वनरक्षक और जेल प्रहरी के अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता
इस विवाद का असर उन युवाओं पर पड़ सकता है, जो परीक्षा देने के बाद परिणाम और नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कर्मचारी चयन मंडल वनरक्षक एवं जेल प्रहरी, समूह-2 उपसमूह-4, पटवारी और सहायक उपनिरीक्षक (कंप्यूटर) समेत विभिन्न पदों के लिए परीक्षाएं आयोजित कर चुका है।
इन भर्तियों में सात हजार से अधिक पदों पर चयन प्रक्रिया आगे बढ़नी है। आरक्षण संबंधी स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण परिणाम घोषित करने में देरी की आशंका है। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि सभी छह परीक्षाओं के परिणाम प्रभावित होंगे या कुछ भर्तियों में अलग व्यवस्था के तहत प्रक्रिया जारी रखी जा सकेगी।
सामान्य प्रशासन विभाग के जवाब पर टिकी निगाहें
सूत्रों के अनुसार, कर्मचारी चयन मंडल ने परिणाम जारी करने की प्रक्रिया को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन मांगा है। विभाग से यह स्पष्ट करने की अपेक्षा है कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद लंबित पदों पर चयन किस आधार पर किया जाए और आरक्षण संबंधी प्रावधानों को किस तरह लागू किया जाए।
फिलहाल इस मामले में आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं होने से अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है। सरकार और संबंधित विभागों के स्तर पर आरक्षण के फार्मूले को लेकर स्थिति साफ होने के बाद ही परिणाम जारी करने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। हजारों अभ्यर्थियों के लिए अब सबसे अहम सवाल यही है कि कानूनी विवाद का समाधान कब होगा और भर्ती प्रक्रिया कब आगे बढ़ेगी।


