भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार के मंत्रियों की कार्यप्रणाली का आंतरिक मूल्यांकन पूरा कर लिया गया है। इसके बाद मंत्रियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विधानसभा के मानसून सत्र के बाद मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल पर फैसला लिया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा संगठन के वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई समीक्षा बैठकों के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें मंत्रियों के कार्य प्रदर्शन, विभागीय योजनाओं की प्रगति, संगठन के साथ समन्वय, जिलों में प्रवास और प्रभार वाले क्षेत्रों में सक्रियता जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं का मूल्यांकन किया गया है।
प्रदर्शन के आधार पर होगा फैसला
जानकारी के मुताबिक, रिपोर्ट तैयार करने के लिए मंत्रियों से प्राप्त फीडबैक, विभागीय उपलब्धियों और सरकार की मॉनिटरिंग प्रणाली से मिले आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। कुछ मंत्रियों का प्रदर्शन अपेक्षा से बेहतर माना गया है, जबकि कुछ मंत्री निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतर पाए हैं।
अब केंद्रीय नेतृत्व इन रिपोर्टों की समीक्षा कर यह तय करेगा कि मंत्रिमंडल में किन चेहरों को बरकरार रखा जाए, किनके विभागों में बदलाव किया जाए और किन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाए।
चार पद अभी भी खाली
वर्तमान में मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित राज्य मंत्रिमंडल में कुल 31 सदस्य शामिल हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मंत्रिमंडल में अभी चार पद खाली हैं। ऐसे में लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाएं जताई जा रही हैं। माना जा रहा है कि आगामी फेरबदल में नए चेहरों को भी मौका मिल सकता है।
मानसून सत्र के बाद बढ़ सकती है राजनीतिक हलचल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मानसून सत्र समाप्त होने के बाद भाजपा संगठन और केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से मंत्रिमंडल में बदलाव संबंधी निर्णय लिए जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो प्रदेश की राजनीति में नई समीकरणों और नेतृत्व संतुलन की तस्वीर भी देखने को मिल सकती है।


