भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में सोमवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यूसीसी के प्रारूप पर सुझाव जुटाने के लिए गठित समिति आज भोपाल में राजनीतिक दलों, धर्मगुरुओं, विभिन्न आयोगों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करेगी। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद यूसीसी विधेयक का अंतिम ड्राफ्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंप दिया जाएगा।
नरोन्हा प्रशासन अकादमी में दिनभर चलेगा विचार-विमर्श
भोपाल स्थित नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में सुबह से शाम तक विभिन्न चरणों में बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसमें महिला आयोग, बाल आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग और अल्पसंख्यक आयोग सहित कई संस्थाओं के प्रतिनिधि अपने सुझाव प्रस्तुत करेंगे।
दोपहर में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा होगी, जबकि शाम को विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं और सामाजिक प्रतिनिधियों से संवाद किया जाएगा। समिति का उद्देश्य सभी वर्गों की राय को अंतिम मसौदे में शामिल करना है।
वरिष्ठ अधिकारियों से भी लिया जाएगा फीडबैक
यूसीसी समिति ने राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों को भी आमंत्रित किया है। गृह विभाग कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और संभावित प्रभावों को लेकर अपना प्रस्तुतीकरण देगा, जबकि अन्य विभाग अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े सुझाव समिति के समक्ष रखेंगे।
सूत्रों के अनुसार समिति को ऑनलाइन पोर्टल, जनसुनवाई और अन्य माध्यमों से करीब दो से ढाई लाख सुझाव प्राप्त हुए हैं। इन सुझावों का अध्ययन करने के बाद ही यूसीसी का अंतिम प्रारूप तैयार किया जा रहा है।
सभी वर्गों की चिंताओं को शामिल करने की कोशिश
समिति का प्रयास है कि यूसीसी के मसौदे में समाज के सभी वर्गों के हितों, सुझावों और आशंकाओं को संतुलित रूप से स्थान दिया जाए। इसी उद्देश्य से पिछले कई महीनों से व्यापक जनपरामर्श अभियान चलाया गया है।
विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से भी सुझाव लिए गए हैं। सोमवार की बैठक को इस पूरी प्रक्रिया का अंतिम और सबसे अहम चरण माना जा रहा है।
मानसून सत्र में पेश हो सकता है UCC विधेयक
समिति की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपे जाने के बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ सचिव समिति इसका परीक्षण करेगी। इसके बाद प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता वाली कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।
कैबिनेट से मंजूरी मिलने पर यूसीसी विधेयक को 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है। सरकार इसे प्रदेश में कानून के रूप में लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
अंतिम चरण में पहुंची जनपरामर्श प्रक्रिया
मध्य प्रदेश सरकार लंबे समय से समान नागरिक संहिता को लेकर विभिन्न वर्गों से राय ले रही है। आम नागरिकों से लेकर विशेषज्ञों और धार्मिक नेताओं तक के सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। ऐसे में भोपाल में होने वाली यह बैठक यूसीसी की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट में किन प्रमुख सुझावों को शामिल करती है और सरकार इसे किस स्वरूप में विधानसभा में पेश करती है।


