आईजी कॉन्फ्रेंस में पुलिस की सराहना, तीन साल में 22 हजार भर्ती का ऐलान; कलेक्टरों से बोले- जुलाई में होगा रिपोर्ट कार्ड का आकलन
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और सुशासन को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। एक ओर उन्होंने पुलिस मुख्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय आईजी कॉन्फ्रेंस में पुलिस अधिकारियों और जवानों की उपलब्धियों की सराहना की, वहीं मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कलेक्टरों को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि प्रदेश के हर अधिकारी के कामकाज पर उनकी नजर है।
आईजी कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस ने ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो पाकिस्तान के इशारे पर देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता था। उन्होंने कहा कि भोपाल से गिरफ्तार फराज जैसे तत्वों पर कार्रवाई यह साबित करती है कि प्रदेश पुलिस राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए है। जांच में कुछ जिहादी साहित्य भी बरामद हुआ है, जिसकी पड़ताल जारी है।
मुख्यमंत्री ने पुलिस की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले ढाई वर्षों में नक्सलवाद के खात्मे, साइबर अपराधों पर नियंत्रण और संवेदनशील मामलों के बेहतर प्रबंधन में पुलिस ने उल्लेखनीय कार्य किया है। धार की भोजशाला मामले में न्यायालय के फैसले के बाद पुलिस द्वारा दिखाई गई समझदारी की भी उन्होंने प्रशंसा की। डॉ. यादव ने बताया कि आठ वर्ष बाद प्रदेश में सब-इंस्पेक्टर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई है और अगले तीन वर्षों में 22 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती की जाएगी। इसके लिए हर वर्ष नियमित भर्ती अभियान चलाया जाएगा।
पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता सबसे बड़ी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस का पहला दायित्व जनता के मन में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के प्रति विश्वास बनाए रखना है। उन्होंने निर्देश दिए कि पीड़ितों के साथ विनम्र व्यवहार किया जाए और उनकी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही साइबर अपराध, सड़क दुर्घटनाओं, मानव तस्करी, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा धार्मिक स्थलों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों से जुड़े न्यायालयीन निर्देशों के प्रभावी पालन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 के दौरान मध्यप्रदेश पुलिस के पास देश-दुनिया के सामने अपनी दक्षता और सेवा भावना प्रदर्शित करने का बड़ा अवसर होगा।
यूसीसी तैयारियों पर समीक्षा, जुलाई में होगी बड़ी परीक्षा
मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की तैयारियों को लेकर कलेक्टरों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 55 में से 46 जिलों में यूसीसी को लेकर बैठकें आयोजित हो चुकी हैं। आमजन और कर्मचारियों से सुझाव लेने के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है, जिसमें 22 प्रश्नों के माध्यम से राय ली जा रही है। डॉ. यादव ने कहा कि जुलाई में भोपाल में कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी, जिसमें कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक प्रदर्शन के आधार पर जिलों की रैंकिंग तय की जाएगी।
‘मैं देख रहा हूं कौन बोलता है और कौन चुप रहता है’
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री का सबसे चर्चित बयान तब आया जब उन्होंने कहा कि वे लगातार देख रहे हैं कि कौन-कौन से कलेक्टर चर्चा में सक्रिय रहते हैं और कौन केवल सुनकर बैठक समाप्त कर देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी भी उनके मूल्यांकन का हिस्सा बनेगी। सूत्रों के अनुसार इंदौर, जबलपुर, सीधी, गुना, डिंडौरी और खंडवा के कलेक्टर बैठकों में नियमित रूप से अपनी बात रखते हैं। मुख्यमंत्री ने अन्य अधिकारियों को भी संवाद और सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित किया।
मानसून और नीट परीक्षा पर विशेष सतर्कता
मुख्यमंत्री ने मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा करते हुए नगरीय निकायों को नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। साथ ही 21 जून को होने वाली नीट परीक्षा को लेकर कहा कि इसकी व्यवस्थाएं यूपीएससी जैसी संवेदनशील परीक्षाओं से भी अधिक सतर्कता और पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित की जाएं।
जवाबदेही से तय होगा अफसरों का भविष्य
मुख्यमंत्री के तेवरों को प्रशासनिक गलियारों में स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। जुलाई में होने वाली कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस केवल समीक्षा बैठक नहीं होगी, बल्कि जिलों और अधिकारियों के प्रदर्शन का रिपोर्ट कार्ड भी साबित हो सकती है। शासन अब केवल योजनाओं के क्रियान्वयन ही नहीं, बल्कि अधिकारियों की सक्रियता, जवाबदेही और संवाद क्षमता को भी मूल्यांकन का आधार बनाने जा रहा है।


