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    बीना में 50 हजार करोड़ रुपये से बनेगी पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री, सालाना 22 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य

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    भोपाल/मुंबई। मध्यप्रदेश में पेट्रोकेमिकल उद्योग को बड़ा विस्तार देने की तैयारी है। सागर जिले के बीना में 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल परियोजना विकसित की जाएगी। इस परियोजना से सालाना 22 लाख टन से अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे प्लास्टिक, पैकेजिंग, फार्मा, टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल उद्योगों को कच्चा माल मिलेगा तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित इंडिया केम-2026 के उद्घाटन सत्र में मध्यप्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं और निवेश योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद रहे।

    12 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर काम

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है। बिजली, पानी, जमीन और औद्योगिक सुविधाओं की उपलब्धता प्रदेश को रसायन एवं पेट्रोकेमिकल उद्योगों के लिए उपयुक्त बनाती है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद प्रदेश में करीब 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की दिशा में काम आगे बढ़ा है। सरकार का लक्ष्य इन प्रस्तावों को वास्तविक औद्योगिक इकाइयों में बदलकर उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा देना है।

    बीना, विजयपुर और आष्टा में औद्योगिक विस्तार

    डॉ. यादव ने बताया कि बीना की पेट्रोकेमिकल परियोजना के अलावा विजयपुर में गेल के गैस प्रसंस्करण ढांचे और सीहोर जिले के आष्टा में गेल इंडिया की पेट्रोकेमिकल परियोजना से भी औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

    रायसेन जिले के तामोट में 121 एकड़ और ग्वालियर जिले के बिलोवा में 93 एकड़ क्षेत्र में प्लास्टिक पार्क विकसित किए गए हैं। इनका उद्देश्य प्लास्टिक और पॉलिमर आधारित छोटे तथा मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मित्रा पार्क से प्रदेश में कपड़ा उद्योग के विस्तार और निवेश की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

    2040 तक एक ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। वर्ष 2014 में इस क्षेत्र का बाजार करीब 120 अरब डॉलर था, जो अब दोगुने से अधिक हो चुका है। उन्होंने वर्ष 2014 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में करीब एक लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आने का भी उल्लेख किया।

    उन्होंने कहा कि वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति शृंखला में बाधाओं के बावजूद भारत के सामने नए औद्योगिक अवसर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2040 तक देश के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को एक ट्रिलियन डॉलर का उद्योग बनाने का लक्ष्य है। मध्यप्रदेश इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए तैयार है।

    रसायन उद्योग में सुरक्षा और गुणवत्ता पर जोर

    केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने रसायन उद्योग में सुरक्षा, गुणवत्ता और कारोबार को आसान बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि खतरनाक रसायनों से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों में दुर्घटनाओं की आशंका कम करने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पांच साल में करीब 3,000 इकाइयों को प्रशिक्षण कार्यक्रम के दायरे में लाने का लक्ष्य है। अब तक 26 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए लगभग 2,500 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

    पटेल ने गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका क्रियान्वयन करते समय छोटे उद्योगों और डाउनस्ट्रीम इकाइयों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने खतरनाक कचरे के निपटान और औद्योगिक नियमों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए संबंधित मंत्रालयों के साथ चर्चा की जानकारी दी।

    महाराष्ट्र भी बढ़ाएगा रसायन उद्योग में निवेश

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि निवेश आकर्षित करने के लिए राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा है। महाराष्ट्र में करीब 3,600 रसायन उद्योग संचालित हैं। देश के रसायन क्षेत्र के सकल मूल्यवर्धन में राज्य की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत और रसायन क्षेत्र के निर्यात में 17 प्रतिशत है। इस उद्योग से राज्य में करीब तीन लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।

    फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार रसायन उद्योग के लिए अलग नीति तैयार कर रही है। इसके अलावा वाढवण बंदरगाह के आसपास 2,500 से 5,000 एकड़ जमीन पर बड़ा रसायन उद्योग क्षेत्र विकसित करने की योजना है। उन्होंने मेथनॉल, एसिटिक एसिड और दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सक्रिय औषधीय घटकों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

    इंडिया केम-2026 में निवेश और तकनीक पर मंथन

    केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा की मौजूदगी में शुरू हुए इंडिया केम-2026 के 14वें संस्करण में रसायन, पेट्रोकेमिकल, पॉलिमर और कृषि रसायन उद्योगों से जुड़े देश-विदेश के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। तीन दिवसीय आयोजन में निवेश, नई तकनीक, नवाचार, गुणवत्ता, औद्योगिक सुरक्षा और वैश्विक साझेदारी जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है।

    बीना की प्रस्तावित परियोजना से मध्यप्रदेश में पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। हालांकि, निवेश प्रस्तावों को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारना, सहायक उद्योगों को विकसित करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन सुनिश्चित करना इस औद्योगिक विस्तार की सफलता के अहम पहलू होंगे।

     

     

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