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    भोपाल नगर निगम में भर्राशाही: मकान को 150 बेड का अस्पताल बताकर टैक्स बढ़ाया

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    एलडीसी की आईडी से बदली संपत्ति की श्रेणी, 11 हजार से बढ़कर 1.25 लाख रुपये हुआ टैक्स; तत्कालीन वार्ड प्रभारी निलंबित करने और कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त करने के निर्देश

    भोपाल। Bhopal Municipal Corporation: भोपाल नगर निगम के संपत्ति कर सिस्टम में गड़बड़ी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने निगम की कार्यप्रणाली और तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड 69 के न्यू अशोक गार्डन स्थित एक आवासीय मकान को रिकॉर्ड में 150 बिस्तरों का अस्पताल दर्शा दिया गया। इसके बाद संपत्ति पर लगने वाला टैक्स करीब 11 हजार रुपये से बढ़कर 1.25 लाख रुपये से अधिक हो गया। हैरानी की बात यह है कि संपत्ति की श्रेणी और टैक्स में बदलाव लोअर डिवीजन क्लर्क (एलडीसी) की यूजर आईडी से दर्ज हुआ, जबकि इस आईडी को ऐसे संशोधन करने का अधिकार ही नहीं है।

    मामला सामने आने के बाद नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने जांच के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत तत्कालीन वार्ड प्रभारी को निलंबित करने और संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीमित अधिकार वाली आईडी से इतना बड़ा बदलाव आखिर कैसे हो गया? क्या सिस्टम में तकनीकी खामी थी या किसी स्तर पर नियमों को दरकिनार किया गया? इसकी पड़ताल की जा रही है।

    आवासीय मकान को अस्पताल बताकर बढ़ा दिया टैक्स

    मामला वार्ड 69 के न्यू अशोक गार्डन स्थित सुनीता खरे के मकान से जुड़ा है। उपलब्ध टैक्स रसीदों के अनुसार, इस संपत्ति पर पहले आवासीय उपयोग के आधार पर कर जमा होता रहा है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 6,402 रुपये, 2023-24 में 6,493 रुपये और 2024-25 में 8,973 रुपये का टैक्स जमा किया गया था। वर्ष 2025-26 में यह राशि 11,566 रुपये रही।

    इसके बाद निगम के रिकॉर्ड में संपत्ति की श्रेणी बदलकर उसे 150 बिस्तरों का अस्पताल दर्शा दिया गया। इसके साथ वाणिज्यिक लाइसेंस शुल्क और सीवरेज टैक्स जैसी देनदारियां भी जुड़ गईं। नतीजतन, संपत्ति पर टैक्स की राशि 1.25 लाख रुपये से अधिक हो गई। संपत्ति मालिक ने इस बदलाव पर आपत्ति जताते हुए निगम प्रशासन से शिकायत की।

    जिस आईडी को अधिकार नहीं, उससे कैसे हुआ बदलाव?

    इस पूरे मामले में निगम के सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरी है। बताया गया है कि एलडीसी की यूजर आईडी से केवल टैक्स रसीद जारी करने की अनुमति है। संपत्ति की श्रेणी बदलने, नया खाता दर्ज करने या कर राशि में संशोधन करने का अधिकार इस आईडी में शामिल नहीं है।

    इसके बावजूद इसी आईडी से संपत्ति के रिकॉर्ड में बदलाव दर्ज होने की बात सामने आई है। ऐसे में जांच का केंद्र यह है कि क्या सॉफ्टवेयर में उपयोगकर्ता के अधिकारों का निर्धारण ठीक से नहीं किया गया था, किसी अन्य स्तर से बदलाव हुआ या आईडी का अनुचित इस्तेमाल किया गया। तकनीकी जांच के बाद ही इसकी वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

    शिकायत के बाद सुधारा गया रिकॉर्ड

    संपत्ति मालिक की शिकायत के बाद मामला निगम की टीएल बैठक में भी उठा। निगमायुक्त के निर्देश पर रिकॉर्ड में संशोधन किया गया। इसके बाद 15 अक्टूबर 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवासीय उपयोग के आधार पर 11,073 रुपये की ऑनलाइन टैक्स रसीद जारी की गई। इससे पहले गलत श्रेणी दर्ज होने के कारण कर की देनदारी कई गुना बढ़ गई थी।

    तबादले के बाद कार्रवाई की तैयारी

    वार्ड 69 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी कपिल बंसल का 3 सितंबर को वार्ड 68 में तबादला हो चुका था। अब उन्हें निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई भी की जा रही है।

    निगम की व्यवस्था पर उठे सवाल

    यह मामला केवल एक संपत्ति के टैक्स में गड़बड़ी तक सीमित नहीं है। इससे यह सवाल भी उठता है कि नगर निगम के डिजिटल सिस्टम में अलग-अलग कर्मचारियों को दिए गए अधिकारों की निगरानी किस तरह की जाती है। यदि सीमित अधिकार वाली आईडी से संपत्ति की श्रेणी और कर निर्धारण में बदलाव दर्ज हो सकता है, तो अन्य संपत्तियों के रिकॉर्ड की सुरक्षा और विश्वसनीयता की जांच भी जरूरी हो जाती है।

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