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    भोपाल मास्टर प्लान-2047 पर किसान-व्यापारी लामबंद, तीन फैसलों पर जताई आपत्ति

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    78 गांवों की आपत्तियों के साथ टीएनसीपी दफ्तर पहुंचे किसान, बोले- मांगें नहीं मानीं तो ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर देंगे धरना 

    भोपाल। Bhopal Master Plan 2047 : भोपाल के मास्टर प्लान-2047 के प्रारूप को लेकर किसानों और व्यापारियों का विरोध तेज होने लगा है। कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव, बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण संबंधी प्रावधानों और पंचायत प्रतिनिधियों को चर्चा में शामिल नहीं किए जाने पर सवाल उठाते हुए शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान शाहपुरा स्थित नगर तथा ग्राम निवेश (टीएनसीपी) कार्यालय पहुंचे। किसानों ने 78 गांवों से संबंधित आपत्तियों का ज्ञापन उपसंचालक हरिओम माहेश्वरी को सौंपा। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर विचार नहीं हुआ तो किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ पहुंचकर कार्यालय के सामने धरना देंगे। व्यापारियों ने भी मास्टर प्लान के प्रारूप में विसंगतियां होने की बात कहते हुए आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

    जनपद पंचायत फंदा के अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत ने आरोप लगाया कि अधिकारी मास्टर प्लान तैयार करने में गड़बड़ी कर रहे हैं। सरपंच प्रतिनिधि घनश्याम पाटीदार ने कहा कि योजना में शामिल गांवों के सरपंचों को बैठकों में नहीं बुलाया गया। किसानों ने सवाल उठाया कि जिन पंचायतों और ग्रामीणों की जमीनों पर योजना का सीधा असर पड़ेगा, उनकी राय लिए बिना भू-उपयोग में बदलाव का प्रस्ताव कैसे तैयार किया गया।

    कृषि भूमि के भविष्य पर चिंता

    किसानों का कहना है कि वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में संबंधित जमीनों का भू-उपयोग कृषि निर्धारित था। वर्ष 2031 के लिए तैयार किए गए, बाद में निरस्त हुए मास्टर प्लान के प्रारूप में भी इन जमीनों को कृषि उपयोग में रखने का प्रावधान था। इसके बावजूद नए प्रारूप में बड़े तालाब के आसपास की कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव का प्रस्ताव किसानों की चिंता बढ़ा रहा है।

    किसानों के मुताबिक, पूर्व में मास्टर प्लान-2031 को लेकर उठी आपत्तियों के बाद सरकार ने पंचायतों की सहमति से प्रारूप तैयार करने का आश्वासन दिया था। उनका आरोप है कि इस बार संबंधित पंचायतों को पर्याप्त रूप से विश्वास में नहीं लिया गया। किसान चाहते हैं कि कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए सुरक्षित रखा जाए, ताकि उनकी आजीविका और जमीन से जुड़े अधिकार प्रभावित न हों।

    भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष अखिलेश मीणा ने भी निजी भूमि, कृषि कार्य और किसानों के अधिकारों पर असर डालने वाले प्रावधानों पर आपत्ति दर्ज कराने की बात कही। प्रदर्शन के दौरान किसान ‘किसान शक्ति जागेगी, सारी समस्या भागेगी’ लिखे बोर्ड लेकर पहुंचे।

    रसूखदारों के इलाकों में निर्माण सीमा बढ़ाने पर सवाल

    मास्टर प्लान के प्रारूप में बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण संबंधी प्रावधानों को लेकर भी विरोधाभास का आरोप लगाया गया है। किसानों और आलोचकों का कहना है कि कुछ इलाकों में आम लोगों के मकानों पर निर्माण संबंधी प्रतिबंध हैं, जबकि एलडीआर में शामिल क्षेत्रों में निर्माण की सीमा पांच गुना तक बढ़ाने का प्रावधान किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। इन क्षेत्रों में प्रभावशाली लोगों के बंगले और फार्म हाउस होने की बात भी कही जा रही है।

    आरोप है कि नए प्रावधानों से पहले से निर्धारित सीमा से अधिक हुए निर्माण को लाभ मिल सकता है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए प्रस्तावित नियमों, मौजूदा निर्माण अनुमतियों और भूमि अभिलेखों की जांच जरूरी है। किसानों ने भोजताल के संरक्षण और ग्रीन बेल्ट से जुड़े प्रावधानों के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए हैं।

    कैचमेंट क्षेत्र के 40 हजार मकानों का मुद्दा

    प्रदर्शन से जुड़े दावों के मुताबिक, कैचमेंट क्षेत्र में कृषि उपयोग वाली श्रेणी के अंतर्गत करीब 40 हजार मकान हैं, जिनमें लगभग तीन लाख लोग रहते हैं। यह भोपाल की करीब 24 लाख आबादी का लगभग 12.5 प्रतिशत बताया जा रहा है। किसानों को आशंका है कि मास्टर प्लान के प्रावधानों की व्याख्या के आधार पर इन मकानों की वैधता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

    यदि इन मकानों पर नियमानुसार कार्रवाई की स्थिति बनती है, तो इतनी बड़ी आबादी के भविष्य और पुनर्वास को लेकर क्या व्यवस्था होगी, यह अहम सवाल है। हालांकि, मकानों की वास्तविक कानूनी स्थिति और उन पर लागू नियमों की पुष्टि संबंधित भू-अभिलेखों तथा मास्टर प्लान के प्रावधानों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

    बीआईजेड-1 और बीआईजेड-2 जोन हटाने की मांग

    किसान भोजताल संरक्षण जोन-1 और जोन-2 को हटाने तथा अपनी कृषि भूमि का भू-उपयोग कृषि ही बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। किसान अनोखी सिंह पटेल का कहना है कि खेती ही किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में भू-उपयोग में बदलाव से उनके आर्थिक हित प्रभावित हो सकते हैं।

    किसान मनोहर सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रारूप तैयार करने में रसूखदारों और बिल्डरों के हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने भोज वेटलैंड और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में निर्माण स्वीकृतियों से जुड़े मामलों की जांच की मांग की। उनका कहना है कि यदि कृषि भूमि पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं, तो किसानों के आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।

    व्यापार संघ की ओर से अभिषेक जैन अब्बू ने भी मास्टर प्लान के प्रारूप में विसंगतियां होने की बात कही। उन्होंने कहा कि योजना को अंतिम रूप देने से पहले व्यापारियों की समस्याओं पर चर्चा कर उनके सुझावों पर विचार किया जाना चाहिए।

    आपत्तियों पर सुनवाई के लिए बुलाएंगे : टीएनसीपी

    टीएनसीपी की संयुक्त संचालक इंदू त्रिपाठी ने बताया कि नियमानुसार 30 दिन के भीतर मास्टर प्लान के प्रारूप पर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। प्राप्त आपत्तियों को ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। इसके बाद संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।

    उपसंचालक हरिओम माहेश्वरी ने भी किसानों के ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराने और संबंधित पक्षों को निर्धारित समय-सीमा में सुनवाई का अवसर देने की बात कही। अब देखना होगा कि किसानों और व्यापारियों की आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान क्या निर्णय लिए जाते हैं और मास्टर प्लान के अंतिम प्रारूप में उनकी चिंताओं का कितना समाधान हो पाता है।

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