माया और श्रीपदा RO प्लांट की जांच करने पहुंची प्रशासन की टीम
हरदा। शहर में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। माया RO प्लांट और श्रीपदा RO प्लांट के सह-संचालन को लेकर मिली शिकायत के बाद प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों की संयुक्त टीम ने अचानक मौके पर पहुंचकर जांच की। इस दौरान दोनों प्लांटों से पानी के नमूने लिए गए। जांच में कुछ केमिकल भी मिलने की जानकारी सामने आई है। अचानक हुई कार्रवाई से शहर के अन्य RO प्लांट संचालकों में भी हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, शिकायत मिलने पर SDM शैलेंद्र बड़ोनिया के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने दोनों प्लांटों का निरीक्षण किया। टीम में मंडीदीप प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संध्या मैडम और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के अधिकारी सहित अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारी शामिल थे। अधिकारियों ने प्लांटों में पानी के शुद्धिकरण की व्यवस्था और अन्य प्रक्रियाओं का जायजा लिया। इस दौरान पानी के नमूने एकत्रित किए गए।
जांच के दौरान कुछ केमिकल मिलने की बात भी सामने आई है। हालांकि, ये केमिकल किस प्रकृति के हैं और इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था, इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल अधिकारियों ने किसी भी प्लांट को दोषी घोषित नहीं किया है।
पेयजल की गुणवत्ता पर उठे सवाल
शहर में बड़ी संख्या में लोग घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए RO प्लांटों से मिलने वाले पानी पर निर्भर हैं। ऐसे में पानी की शुद्धता और उसे साफ करने की प्रक्रिया का निर्धारित मानकों के अनुरूप होना जरूरी है। यदि पेयजल गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो इससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। दूषित पानी के सेवन से पेट संबंधी संक्रमण और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा रहता है।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई
अधिकारियों ने पानी के नमूने लेकर उनकी जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रिपोर्ट में यदि पानी की गुणवत्ता या शुद्धिकरण प्रक्रिया में अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित प्लांट संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। बताया जा रहा है कि हरदा में RO प्लांटों की इस तरह की जांच पहली बार की गई है।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद दूसरे RO प्लांट संचालक भी सतर्क हो गए हैं। अब शहरवासियों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि RO प्लांटों से घरों तक पहुंच रहा पानी वास्तव में पीने योग्य और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है या नहीं।


