नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन को देखते हुए आरबीआई इस बार भी रेपो रेट में बदलाव नहीं करने का फैसला ले सकता है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 3 से 5 अगस्त 2026 तक होगी, जबकि नीतिगत फैसलों की घोषणा 5 अगस्त को की जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, खुदरा महंगाई अगले दो तिमाहियों तक 5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है, वहीं आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान है।
रेपो रेट स्थिर रखने के संकेत
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में ब्याज दरों में बदलाव करना आरबीआई के लिए उचित नहीं होगा। महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने और आर्थिक विकास को गति देने के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक यथास्थिति बनाए रख सकता है।
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये की कमजोरी और वैश्विक बाजार में पूंजी प्रवाह की अनिश्चितता को देखते हुए आरबीआई बहुत ज्यादा नरम रुख अपनाने से बच सकता है।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, जुलाई में भारत में करीब 35 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया। इसके चलते 24 जुलाई तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 12.5 अरब डॉलर बढ़ गया।
रिपोर्ट में बताया गया कि जून के अंत तक तीन महीने तक की अवधि वाले फॉरवर्ड पोजीशन में करीब 13 अरब डॉलर की कमी आई, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार पर दबाव कम हुआ।
GDP ग्रोथ 7% से ज्यादा रहने का अनुमान
एसबीआई रिसर्च ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक रह सकती है। इससे पहले आरबीआई ने वैश्विक परिस्थितियों के चलते जीडीपी वृद्धि अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया था।
वैश्विक संकट का असर, लेकिन भारत की स्थिति मजबूत
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका सहित कई देशों में आर्थिक सुस्ती के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन कर रही है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अप्रैल-जून 2026 तिमाही में अपेक्षा से अधिक सुस्ती दर्ज की गई है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर देखने को मिल सकता है।
5 अगस्त को होगा अंतिम फैसला
आरबीआई की MPC बैठक में महंगाई, आर्थिक विकास, वैश्विक हालात और बाजार की स्थिति पर चर्चा के बाद ब्याज दरों को लेकर फैसला लिया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल रेपो रेट को स्थिर रखने की संभावना सबसे ज्यादा है।


