उज्जैन। दीपावली का पांच दिवसीय दीपोत्सव वर्ष 2026 में 6 नवंबर से शुरू होकर 11 नवंबर तक मनाया जाएगा। इस दौरान धनतेरस, छोटी दिवाली, महालक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज के पर्व आएंगे। खास बात यह है कि इस बार छोटी दिवाली और मुख्य दीपावली 8 नवंबर को ही मनाई जाएगी, जबकि 9 नवंबर को अमावस्या रहने के कारण गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को होगी। आइए जानते हैं पांचों पर्वों की तारीख, भोपाल के अनुसार पूजा मुहूर्त, मंत्र और पूजा-विधि।
1. धनतेरस : 6 नवंबर, शुक्रवार
धनतेरस से दीपोत्सव की शुरुआत होगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और नई वस्तुएं खरीदना शुभ होता है।
शुभ मुहूर्त: शाम 6:10 से रात 8:08 बजे तक।
पूजा विधि: घर की सफाई कर पूजा स्थल पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की प्रतिमा स्थापित करें। दीपक जलाकर फूल, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें। घर के बाहर दक्षिण दिशा में यम दीपक जलाने की भी परंपरा है।
मंत्र:
ॐ धन्वंतरये नमः।
2. छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी : 8 नवंबर, रविवार
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की स्मृति में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इसे रूप चौदस और छोटी दिवाली भी कहते हैं। इस दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान और दीपदान का विशेष महत्व है।
पूजा विधि: सुबह तेल से मालिश कर स्नान करें। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें और शाम को घर के कोनों तथा मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं।
मंत्र:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
3. दीपावली और महालक्ष्मी पूजन : 8 नवंबर, रविवार
दीपावली कार्तिक अमावस्या को मनाई जाएगी। इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और मां सरस्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि दीपावली की रात माता लक्ष्मी का घर में आगमन होता है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
शुभ मुहूर्त (भोपाल): शाम 6:02 से रात 8:01 बजे तक। यह प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न का विशेष मुहूर्त है।
पूजा विधि: घर और पूजा स्थल को फूलों, रंगोली और दीपकों से सजाएं। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें। इसके बाद माता लक्ष्मी को कमल, फूल, फल, मिठाई, धूप और दीप अर्पित करें। कुबेर पूजन और आरती के बाद प्रसाद वितरित करें।
महालक्ष्मी मंत्र:
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
गणेश मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः।
4. गोवर्धन पूजा : 10 नवंबर, मंगलवार
गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पर्व भी कहते हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की कथा का स्मरण किया जाता है।
शुभ मुहूर्त (भोपाल): सुबह 6:30 से 8:44 बजे तक।
पूजा विधि: घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। उसे फूलों से सजाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। अन्नकूट के रूप में विभिन्न प्रकार के पकवान और व्यंजन बनाकर भगवान को भोग लगाएं। गायों की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।
मंत्र:
ॐ गोवर्धनधराय नमः।
5. भाई दूज : 11 नवंबर, बुधवार
भाई दूज के साथ दीपोत्सव का समापन होगा। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
तिलक मुहूर्त (भोपाल): दोपहर 1:10 से 3:23 बजे तक।
पूजा विधि: बहनें पूजा की थाली में रोली, अक्षत, मिठाई, नारियल और दीपक रखें। भाई को आसन पर बैठाकर तिलक लगाएं, आरती उतारें और मिठाई खिलाएं। भाई बहन को उपहार देकर उसके प्रति स्नेह व्यक्त करता है।
मंत्र:
भ्रातस्तवानुजाताहं भुङ्क्ष्व भक्तमिदं शुभम्।
प्रीतये यमराजस्य यमुनायाश्च विशेषतः॥
इस प्रकार दीपावली का पर्व केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का अवसर नहीं, बल्कि धन, स्वास्थ्य, समृद्धि, प्रकृति और पारिवारिक संबंधों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है। पूजा के मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।


