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    कूनो में चीते की गोली मारकर हत्या, दो रेंजर समेत छह वनकर्मी सस्पेंड; दो आरोपी गिरफ्तार

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    19 महीने के नर चीते की मौत के मामले में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई

    भोपाल। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में 19 महीने के नर चीते की गोली लगने से हुई मौत के मामले में वन विभाग और पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में वन विभाग ने दो रेंजर, एक डिप्टी रेंजर और तीन वनरक्षकों सहित छह कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। दूसरी ओर, मुरैना पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से हथियार बरामद किए हैं।

    चीते की मौत के बाद कूनो की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि संरक्षित वन क्षेत्र में हथियार लेकर पहुंचे लोग आखिर वन विभाग की निगरानी से कैसे बच निकले और समय रहते उन्हें क्यों नहीं पकड़ा जा सका?

    25 अक्टूबर को गंभीर हालत में मिला था चीता

    मामले की शुरुआत 25 अक्टूबर को हुई, जब श्योपुर टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन के कंपार्टमेंट नंबर 748 में 19 महीने का नर चीता गंभीर रूप से घायल मिला था। शुरुआती जांच और चिकित्सकीय परीक्षण में उसके शरीर में बाहरी वस्तुओं के प्रवेश की पुष्टि हुई। बेहतर उपचार के लिए उसे जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय भेजा गया।

    ऑपरेशन में निकले पांच छर्रे, नहीं बच सकी जान

    जबलपुर में किए गए सीटी स्कैन से पता चला कि गोली के छर्रों ने चीते के आंतरिक अंगों, मांसपेशियों, हड्डियों और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाया था। आपातकालीन सर्जरी के दौरान उसके शरीर से पांच छर्रे निकाले गए। चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद 27 अक्टूबर की सुबह उसकी मौत हो गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि चीते की मौत किसी प्राकृतिक कारण या वन्यजीव संघर्ष से नहीं, बल्कि गोली लगने से हुई थी।

    वनकर्मियों की लापरवाही की भी पड़ताल

    छह वनकर्मियों के निलंबन के बाद विभागीय स्तर पर उनकी जिम्मेदारियों और सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू हो गई है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संवेदनशील वन क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी किसकी थी और निगरानी में चूक कैसे हुई। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने मामले की सीबीआई जांच कराने के साथ ही कूनो के फील्ड डायरेक्टर और डीएफओ को हटाने की मांग की है।

    केंद्र और राज्य की टीमें कर रहीं जांच

    घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने उच्चस्तरीय जांच टीम कूनो भेजी थी। राज्य सरकार ने भी वन विभाग और पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए विशेष जांच दल गठित किया है। अब जांच का दायरा केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वन क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही भी इसके केंद्र में है।

    करीब 79 साल बाद भारत में चीते की गोली मारकर हत्या की इस घटना ने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चीता की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

     

     

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