भोपाल। मध्यप्रदेश में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार अगले दो से तीन वर्षों तक विशेष अभियान चलाएगी। इसके तहत 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग समितियां गठित की जाएंगी। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रालय में हुई पांचवीं राज्य स्तरीय एनसीओआरडी बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, विभागाध्यक्ष और नारकोटिक्स व पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को मादक पदार्थों के पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए साझा कार्ययोजना बनाने और अपने आंतरिक लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान का संदेश समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए। ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सूचना तंत्र मजबूत करने के साथ नारकोटिक्स वर्टिकल, एसआइबी और स्थानीय पुलिस के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
दो वर्षों में 2.74 लाख किलो मादक पदार्थ नष्ट
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, मादक पदार्थों के विनष्टीकरण के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है। वर्ष 2025 में 2,073 प्रकरणों में 1,44,025 किलोग्राम और वर्ष 2026 में 30 सितंबर तक 2,756 प्रकरणों में 1,30,380 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए। इस अवधि में कुल 2,74,405 किलोग्राम मादक पदार्थों का विनष्टीकरण किया गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक एनडीपीएस अधिनियम के तहत 2,986 मामलों में 4,091 आरोपियों से 50,933 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए। वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआइ) और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने 18 गुप्त प्रयोगशालाओं को ध्वस्त किया।
446 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच
अवैध मादक पदार्थ कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई भी की गई। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025 में एनडीपीएस के 54 मामलों में 300 करोड़ रुपये और वर्ष 2026 में 38 मामलों में 146 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई। इस तरह कुल 446 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कार्रवाई हुई। सितंबर 2026 तक एनडीपीएस के 201 विशेष विचारण मामलों की निगरानी की जा रही थी।
शिक्षण संस्थानों में नशामुक्ति अभियान
500 से अधिक विद्यार्थियों वाले संस्थानों में प्रस्तावित एंटी ड्रग समितियों में शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी, उच्च शिक्षा और सामाजिक न्याय विभाग तथा पुलिस के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समितियों के नोडल अधिकारी स्थानीय थाने के बीट इंचार्ज होंगे। सूचना देने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों की पहचान गोपनीय रखने के लिए भी व्यवस्था विकसित की जाएगी। मादक पदार्थों से संबंधित सूचना देने के लिए हेल्पलाइन 1933 के प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में नशे के खिलाफ जागरूकता के लिए 30,339 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें करीब 2.58 करोड़ लोगों ने भाग लिया। अभियान को सोशल मीडिया पर 58 करोड़ से अधिक व्यूज मिले। फिलहाल सामाजिक न्याय विभाग के 31 और स्वास्थ्य विभाग के 10 नशामुक्ति केंद्र संचालित हैं। जिन जिलों में ऐसे केंद्र नहीं हैं, वहां केंद्र स्थापित करने के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं।
बैठक की प्रमुख बातें
-अगले दो से तीन वर्षों में मादक पदार्थों के पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए विशेष अभियान।
-500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग समितियों का गठन।
-हेल्पलाइन 1933 के प्रचार, गोपनीय सूचना तंत्र और सभी जिलों में नशामुक्ति केंद्र स्थापित करने पर जोर।


