भोपाल। Madhya Pradesh Power Crisis : मध्य प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग और उत्पादन में कमी के चलते संकट गहराने लगा है। प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 17,124 मेगावाट तक पहुंच गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 11,874 मेगावाट थी। यानी बिजली की मांग में करीब 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच करीब 4 हजार मेगावाट से अधिक का अंतर बताया जा रहा है। संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात से बिजली लेने की तैयारी कर रही है। वहीं, बिरसिंहपुर ताप विद्युत परियोजना और सरदार सरोवर परियोजना से उत्पादन शुरू होने के बाद राहत की उम्मीद है।
बिजली की मांग बढ़ी, ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती
प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में बिजली की खपत बढ़ने के साथ ग्रामीण इलाकों में बोवनी और धान की सिंचाई के लिए भी मांग बढ़ गई है। दूसरी ओर, बिजली उत्पादन में करीब एक हजार मेगावाट की कमी ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
भोपाल सहित कई जिलों में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर सामने आया है। सीहोर, बैतूल, भोपाल, विदिशा, राजगढ़, हरदा, नर्मदापुरम, रायसेन, अशोकनगर और भिंड में शाम पांच से छह बजे के बीच 1,312 मेगावाट बिजली की जरूरत के मुकाबले 1,297 मेगावाट आपूर्ति उपलब्ध थी।
बिजली की कमी के कारण कई क्षेत्रों में कटौती की जा रही है। ग्रामीण इलाकों में पांच घंटे तक बिजली नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। शिवपुरी के कुछ क्षेत्रों में किसानों को महज दो घंटे बिजली मिलने की बात कही जा रही है। इससे सिंचाई प्रभावित होने और सब्जियों की फसल सूखने का खतरा बढ़ गया है।
यूपी, पंजाब और गुजरात से बिजली लेने की तैयारी
बिजली संकट से निपटने के लिए सरकार दूसरे राज्यों से आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह के मुताबिक, बिजली की कमी का सामना केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्य भी कर रहे हैं। कोयले की कमी के कारण कई राज्यों में बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है।
जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश से 500 मेगावाट बिजली ले रहा है। वहीं, पंजाब को मध्य प्रदेश की ओर से दी जा रही 500 मेगावाट बिजली की आपूर्ति फिलहाल रोक दी गई है। इसके बदले पंजाब अगले महीने से मध्य प्रदेश को 500 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराएगा।
गुजरात से बिजली लेने के लिए भी बातचीत की गई है। मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने गुजरात के मुख्य सचिव एमके दास से इस संबंध में चर्चा की है। सरकार को उम्मीद है कि दूसरे राज्यों से बिजली की उपलब्धता बढ़ने पर मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर कम किया जा सकेगा।
बिरसिंहपुर और सरदार सरोवर से मिलेगी राहत
बिजली संकट के बीच प्रदेश को दो परियोजनाओं से राहत मिलने की उम्मीद है। तकनीकी खराबी के कारण बिरसिंहपुर ताप विद्युत परियोजना में उत्पादन बंद हो गया था, लेकिन अब यहां बिजली उत्पादन फिर शुरू हो गया है।
इसके अलावा, सरदार सरोवर परियोजना से भी एक हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू होने की जानकारी दी गई है। इन परियोजनाओं से अतिरिक्त बिजली मिलने पर प्रदेश की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।
कैबिनेट में उठा बिजली संकट का मुद्दा
प्रदेश में बिजली की कमी और कटौती का मुद्दा कैबिनेट की बैठक में भी उठा। मंत्रियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं रखीं। कई क्षेत्रों में किसानों के विरोध की खबरें भी सामने आई हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में बिजली संकट की स्थिति बनी है, लेकिन इससे निपटने का रास्ता खोज लिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही हालात सामान्य हो जाएंगे।
सरकार के सामने अब बढ़ती मांग के बीच पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने और ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू जरूरतों के साथ सिंचाई के लिए नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की चुनौती है। दूसरे राज्यों से बिजली लेने और बिजली परियोजनाओं में उत्पादन शुरू होने के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा रही है।


