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    क्या चीनी खाने से कैंसर बढ़ता है? जानिए मीठा पूरी तरह छोड़ना जरूरी है या नहीं

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    नई दिल्ली। कैंसर के इलाज के दौरान खान-पान को लेकर मरीजों और उनके परिवारों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं। इनमें सबसे आम सवाल यह है कि क्या चीनी खाने से कैंसर तेजी से बढ़ता है? क्या कैंसर मरीज को मीठा और कार्बोहाइड्रेट पूरी तरह छोड़ देना चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी खाने से कैंसर सीधे बढ़ता है, इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है। हालांकि, अतिरिक्त चीनी का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    चीनी से कैंसर सीधे बढ़ने का प्रमाण नहीं

    कैंसर कोशिकाएं भी शरीर की दूसरी कोशिकाओं की तरह ऊर्जा के लिए ग्लूकोज का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि चीनी खाने से कैंसर कोशिकाएं सीधे तेजी से बढ़ने लगती हैं।

    शरीर को ग्लूकोज केवल टेबल शुगर से नहीं मिलता। रोटी, चावल, अनाज, फल और अन्य कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों को पचाने के दौरान भी शरीर ग्लूकोज बनाता है। इसलिए कैंसर के इलाज के दौरान चीनी या कार्बोहाइड्रेट को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं माना जाता।

    अतिरिक्त चीनी से क्यों बचना चाहिए?

    कैंसर मरीजों के लिए चिंता मुख्य रूप से अतिरिक्त चीनी को लेकर होती है। मिठाइयां, मीठे शीतल पेय, पैकेज्ड जूस, केक, बिस्किट और अधिक चीनी वाले प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ अतिरिक्त कैलोरी का स्रोत बन सकते हैं।

    लंबे समय तक अतिरिक्त कैलोरी का अधिक सेवन वजन बढ़ने और मोटापे का कारण बन सकता है। मोटापा कई प्रकार के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया है। इसलिए कैंसर से बचाव और इलाज के दौरान अतिरिक्त चीनी तथा मीठे पेय को सीमित रखना बेहतर माना जाता है।

    फल और दूध की प्राकृतिक शुगर से डरने की जरूरत नहीं

    फलों, सब्जियों और दूध में प्राकृतिक रूप से मौजूद शुगर को अतिरिक्त चीनी के समान नहीं माना जाता। फल और सब्जियां शरीर को फाइबर, विटामिन, खनिज और अन्य जरूरी पोषक तत्व भी देते हैं।

    इसलिए केवल चीनी से बचने के लिए फलों और सब्जियों को भोजन से पूरी तरह हटाना उचित नहीं है।

    कैंसर मरीजों की डाइट कैसी हो?

    कैंसर के इलाज के दौरान संतुलित और पौष्टिक भोजन महत्वपूर्ण है। डाइट में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दलिया, ओट्स, दाल, बीन्स और अन्य पौष्टिक प्रोटीन स्रोत शामिल किए जा सकते हैं।

    वहीं, अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और लाल व प्रोसेस्ड मीट का सेवन सीमित रखना बेहतर माना जाता है। मरीज की स्थिति के अनुसार डाइट में बदलाव की जरूरत हो सकती है।

    इलाज के दौरान खुद से डाइट न बदलें

    कीमोथेरेपी या अन्य कैंसर उपचार के दौरान कुछ मरीजों में भूख कम हो सकती है या वजन तेजी से घट सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह के बिना चीनी और कार्बोहाइड्रेट पूरी तरह बंद करना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि शरीर को पर्याप्त कैलोरी और पोषण की जरूरत होती है।

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