नई दिल्ली।Government Land : लंबे समय से खाली पड़ी सरकारी जमीनों और इमारतों के बेहतर आर्थिक इस्तेमाल की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉरपोरेशन (NLMC) के बोर्ड ने 5,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की सरकारी संपत्तियों के मुद्रीकरण से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी है। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।
सरकार इन अनुपयोगी संपत्तियों को बेचने या दीर्घकालीन पट्टे पर देने के जरिए राजस्व जुटाएगी। इसके लिए ऐसी सरकारी जमीनों और इमारतों की पहचान की गई है, जिनका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
क्या है NLMC?
नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉरपोरेशन (NLMC) केंद्र सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है और वित्त मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम विभाग के तहत काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी विभागों की अनुपयोगी जमीनों तथा इमारतों की पहचान कर उनका आर्थिक इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
NLMC इन संपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए बिक्री और दीर्घकालीन पट्टे जैसे विकल्पों पर काम करता है।
संपत्तियों के मुद्रीकरण की प्रक्रिया होगी तेज
NLMC बोर्ड की बैठक में सरकारी संपत्तियों के मुद्रीकरण की प्रक्रिया को तेज करने पर भी चर्चा हुई। जमीन के हस्तांतरण और दस्तावेजी प्रक्रिया में आने वाली अड़चनों को दूर करने पर जोर दिया गया है।
इसके अलावा संपत्तियों की बिक्री और पट्टे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही गई है। NLMC अपनी टीम और तकनीकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है, ताकि अधिक सरकारी संपत्तियों के मुद्रीकरण को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
सरकार का मानना है कि लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी सरकारी संपत्तियों के बेहतर आर्थिक इस्तेमाल से राजस्व जुटाने के साथ-साथ निजी निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी सरकारी संपत्तियों के मुद्रीकरण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


