नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में किसानों, स्वच्छ ऊर्जा, खेल और तेल-गैस क्षेत्र से जुड़े चार बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने, प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना शुरू करने, खेलो इंडिया योजना का विस्तार करने और ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दी।
सरकार का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य किसानों की आय को मजबूत करना, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना, खेल प्रतिभाओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को सशक्त बनाना है।
PM-Kisan योजना अगले 5 वर्षों तक जारी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है।
इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर वर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खाते में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से दी जाती है। सरकार के अनुसार अब तक किसानों के खातों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है।
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मिली मंजूरी
कैबिनेट ने 5,070 करोड़ रुपये की लागत से प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत देशभर में 5,000 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं विकसित की जाएंगी।
इसके साथ 10,000 मेगावाट घंटे (MWh) क्षमता की ऊर्जा भंडारण प्रणाली भी तैयार की जाएगी। सफल परियोजनाओं को प्रति मेगावाट 1 करोड़ रुपये तक की केंद्रीय वित्तीय सहायता मिलेगी। इस योजना का उद्देश्य जलाशयों का उपयोग कर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना है।
खेलो इंडिया योजना का विस्तार
सरकार ने 2026-27 से 2030-31 तक के लिए संशोधित खेलो इंडिया योजना को 36,441 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी है।
इसके अलावा राष्ट्रीय खेल महासंघों को वित्तीय सहायता देने वाली योजना को भी मजबूत किया जाएगा, ताकि खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर खेल सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी का अवसर मिल सके।
‘समुद्र मंथन’ योजना से बढ़ेगी ऊर्जा सुरक्षा
कैबिनेट ने 84,084 करोड़ रुपये के बजट वाली ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को भी मंजूरी दी है। यह योजना 2030-31 तक लागू रहेगी।
इसका उद्देश्य समुद्र में तेल और प्राकृतिक गैस के नए भंडारों की खोज, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। सरकार का अनुमान है कि इस योजना से 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट से अधिक नए हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज संभव हो सकती है।
योजना के तहत गहरे समुद्र में खोजी ड्रिलिंग, उच्च गुणवत्ता वाले सीस्मिक सर्वे, सीमांत बेसिनों का वैज्ञानिक अध्ययन और आधुनिक तेल-गैस अवसंरचना विकसित की जाएगी।


