नई दिल्ली। देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (One Nation, One Election) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से इस व्यवस्था को लागू करने की संभावना पर काम कर रही है। समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने बताया कि अब तक परामर्श प्रक्रिया में शामिल करीब 99 प्रतिशत नागरिकों और संगठनों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।
समिति ने गोवा के मुख्यमंत्री, राज्य सरकार के मंत्रियों, संवैधानिक विशेषज्ञों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों से भी इस विषय पर विस्तृत चर्चा की है। इन सुझावों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
क्या है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’?
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का अर्थ है कि लोकसभा, सभी राज्यों की विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराए जाएं, ताकि बार-बार चुनाव कराने की आवश्यकता न पड़े। इससे सरकारी खर्च में कमी आएगी और प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित नहीं होगा।
2029 तक कैसे लागू हो सकता है?
प्रस्ताव के अनुसार, जिन राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल 2029 के बाद तक रहेगा, उनके कार्यकाल को संविधान संशोधन के जरिए कम किया जा सकता है, ताकि सभी चुनाव एक ही समय पर कराए जा सकें।
वहीं जिन राज्यों का कार्यकाल 2029 से पहले समाप्त होगा, वहां या तो सीमित अवधि के लिए चुनाव कराए जा सकते हैं या संवैधानिक प्रावधानों के तहत अंतरिम व्यवस्था अपनाई जा सकती है, जिससे सभी राज्यों का चुनावी चक्र 2029 में एक साथ आ सके।
सरकार ‘टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल’ पर कर रही विचार
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार और जेपीसी ‘टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल’ पर विचार कर रही है। इसके तहत पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के बजाय प्रक्रिया को दो चरणों में लागू किया जाएगा।
पहला चरण: 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ लगभग 20 राज्यों के विधानसभा चुनाव।
दूसरा चरण: वर्ष 2034 तक सभी राज्यों को एक समान चुनावी चक्र में शामिल करना।
इस मॉडल से राज्यों के कार्यकाल में बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और संक्रमण प्रक्रिया भी आसान होगी।
संविधान में किन बदलावों की होगी जरूरत?
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 83, 172 और 356 सहित कई प्रावधानों में संशोधन करना होगा।
इसके लिए:
संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा।
कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से भी मंजूरी लेनी होगी।
अगर बीच में सरकार गिर जाए तो क्या होगा?
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार यदि किसी राज्य या केंद्र में सरकार कार्यकाल पूरा होने से पहले गिर जाती है, तो मध्यावधि चुनाव पूरे पांच वर्षों के लिए नहीं होंगे। नई सरकार केवल शेष बचे हुए कार्यकाल तक ही काम करेगी, ताकि राष्ट्रीय चुनावी चक्र प्रभावित न हो।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज के डीन और लॉ कमीशन के पूर्व सदस्य आनंद पालीवाल का कहना है कि संविधान में चरणबद्ध तरीके से ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है। हालांकि इसके लिए राजनीतिक सहमति और आवश्यक संवैधानिक संशोधन अनिवार्य होंगे।
रामनाथ कोविंद समिति ने तैयार की थी रिपोर्ट
केंद्र सरकार ने 2 सितंबर 2023 को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर एक उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। समिति ने विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों से चर्चा तथा 191 दिनों के अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी थी।
यदि आवश्यक संवैधानिक और राजनीतिक सहमति बन जाती है, तो 2029 से देश में पहली बार लोकसभा और अधिकांश राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने का रास्ता साफ हो सकता है।


