अयोध्या। राम मंदिर के दानपात्र से चढ़ावा चोरी मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रस्ट की बैठक में उनका इस्तीफा स्वीकार होने के एक दिन बाद उन्होंने रामभक्तों के नाम पत्र जारी कर कहा कि वह SIT (विशेष जांच दल) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों का तथ्यात्मक जवाब देंगे।
‘अब तक इसलिए था मौन’
चंपत राय ने अपने पत्र में लिखा कि 7 जून 2026 को दानपात्र की गणना के दौरान चोरी की घटना सामने आने के बाद उनके खिलाफ कई तरह के आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा कि जांच प्रभावित न हो, इसलिए उन्होंने अब तक चुप्पी साधे रखी।
उन्होंने बताया कि 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की गई, जो बाद में सार्वजनिक हो गई। उनका कहना है कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ जाएगी और वह हर आरोप का क्रमवार जवाब देंगे।
45 साल के सार्वजनिक जीवन का दिया हवाला
चंपत राय ने पत्र में अपने लंबे सार्वजनिक जीवन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1991 में उन्हें संगठन की ओर से अयोध्या भेजा गया था और 45 वर्षों के प्रचारक जीवन में उन्होंने हमेशा पारदर्शिता के साथ काम किया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन हमेशा एक खुली किताब की तरह रहा है।
SIT ने ट्रस्ट के बड़े आयोजनों के खर्च की जांच भी शुरू की
चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही SIT अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बड़े धार्मिक आयोजनों के खर्च का भी परीक्षण कर रही है।
जांच एजेंसी 22 जनवरी 2024 को हुए प्राण प्रतिष्ठा समारोह और 25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण कार्यक्रम से जुड़े बिल, वाउचर और वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा कर रही है।
रिकॉर्ड के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर 113 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जिसमें लगभग 8 हजार अतिथि शामिल हुए। वहीं ध्वजारोहण कार्यक्रम पर 10.12 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें करीब 6 हजार मेहमान मौजूद थे। खर्च में अंतर को लेकर भी जांच की जा रही है।
कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने किया बचाव
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि उनके अनुसार चंपत राय का इस कथित चोरी से कोई प्रत्यक्ष या चारित्रिक संबंध नहीं है। हालांकि उन्होंने माना कि चंपत राय अपने स्टाफ के चयन और निगरानी में पर्याप्त सतर्क नहीं रहे।
उन्होंने दावा किया कि कथित तौर पर आरोपी ड्राइवर के पास कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां थीं और उसी के जरिए यह घटनाक्रम संभव हुआ। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ट्रस्ट में नई निगरानी व्यवस्था लागू करने की बात भी कही।
आरोपियों की रिमांड पर पूछताछ जारी
इस मामले में फैजाबाद की एंटी करप्शन कोर्ट ने तीन आरोपियों—करुणेश पांडेय, अनुकल्प मिश्र और लवकुश—को एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करेगी।


