अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी और गबन मामले की विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट पहली बार सार्वजनिक हुई है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मंदिर के दान और चढ़ावे की गणना के दौरान सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और खुले नोट छिपाने की घटनाएं रिकॉर्ड हुईं। जांच में सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और प्रशासनिक लापरवाही को चोरी का प्रमुख कारण बताया गया है।
एसआईटी की रिपोर्ट सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में पेश की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, 6 फरवरी 2025 को दान गणना प्रक्रिया के लिए बनाई गई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में बाद में ऐसे बदलाव किए गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ गई। अनिवार्य तलाशी की व्यवस्था को नियमित या रैंडम जांच में बदल दिया गया, जिसका आरोपियों ने फायदा उठाया।
अनिल मिश्रा की निगरानी पर सवाल, टिन्नू यादव की भूमिका संदिग्ध
रिपोर्ट में ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं। उन्हें सितंबर 2024 में दान और चढ़ावा प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन एसआईटी के अनुसार प्रभावी पर्यवेक्षण नहीं होने से चोरी की घटनाएं लगातार होती रहीं।
जांच में रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार उनके पास मंदिर की विभिन्न हुंडियों की चाबियां थीं, जबकि इसके लिए कोई औपचारिक प्राधिकरण नहीं था। उन पर अपने रिश्तेदार की गणना ड्यूटी में सिफारिश कर कथित गबन का अवसर उपलब्ध कराने का भी आरोप है।
27 अप्रैल से पहले भी होती रही चोरी
एसआईटी ने माना कि 27 अप्रैल 2025 से पहले भी चोरी और गबन की घटनाएं होती रहीं, लेकिन उस अवधि का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने के कारण वास्तविक नुकसान का आकलन नहीं किया जा सका। हालांकि आरोपियों के बयान और बैंक खातों में आय से अधिक धनराशि मिलने से गड़बड़ी के संकेत मिले हैं।
बैंक और ट्रस्ट दोनों की व्यवस्था पर सवाल
रिपोर्ट में बैंक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। निर्धारित वेशभूषा, कर्मचारियों की तलाशी, निजी सामान पर प्रतिबंध, हुंडीवार गणना, मूल्यवर्ग के अनुसार रिकॉर्ड तैयार करना और सीसीटीवी निगरानी जैसी व्यवस्थाओं का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। ऑडिट में 180 दिन तक सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की सिफारिश थी, लेकिन केवल 45 दिन का बैकअप रखा गया।
आठ लोगों पर FIR की संस्तुति
एसआईटी ने प्रारंभिक जांच के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव और अन्य पर्यवेक्षणीय कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच जारी है।
ट्रस्ट का सख्त रुख
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि चढ़ावे में अनियमितता बेहद गंभीर मामला है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। ट्रस्ट ने कहा कि जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि यदि किसी के पास इस मामले से जुड़े ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें सीधे जांच एजेंसियों को सौंपें।
31 मार्च 2026 तक 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा
ट्रस्ट के अनुसार 31 मार्च 2026 तक रामलला को 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ। इसमें से 391 करोड़ रुपये संचालन और विभिन्न व्यवस्थाओं पर खर्च किए गए हैं। वहीं, मंदिर निर्माण और पूंजीगत कार्यों पर 2,370 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं, जबकि शेष राशि ट्रस्ट के बैंक खातों में सुरक्षित है।
एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। विस्तृत जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट में प्रशासनिक जवाबदेही, संस्थागत खामियों तथा सुधारात्मक उपायों पर विस्तृत सिफारिशें प्रस्तुत की जाएंगी।


