नई दिल्ली। केंद्र सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने WhatsApp के विवादित यूजरनेम फीचर को लेकर मेटा (Meta) को जवाब देने की समयसीमा बढ़ाकर 9 जुलाई कर दी है। पहले यह समयसीमा 6 जुलाई तय की गई थी। सरकार ने साफ कहा है कि इस फीचर को लेकर विस्तृत जानकारी और तकनीकी स्पष्टीकरण जरूरी है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार ने मेटा को यह भी निर्देश दिया है कि जब तक इस विषय पर बातचीत और परामर्श की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च न किया जाए।
क्या है WhatsApp का यूजरनेम फीचर?
WhatsApp का नया यूजरनेम फीचर यूजर्स को बिना फोन नंबर शेयर किए चैट और कॉल करने की सुविधा देता है। यह एक यूनिक आइडेंटिटी की तरह काम करेगा, जिसमें यूजरनेम के आगे एक विशेष सिंबल जुड़ा होगा।
इस फीचर के जरिए:
-यूजर अपना फोन नंबर छुपा सकेंगे
-यूजरनेम के जरिए चैट और कॉल संभव होगी -हर यूजर का नाम यूनिक होगा
-एक ही नाम दो लोग इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे
यूजर सेटिंग्स में जाकर “अकाउंट” और फिर “यूजरनेम” विकल्प से इसे सेट कर सकते हैं।
सरकार को क्यों है चिंता?
सरकार ने इस फीचर को लेकर कई गंभीर आशंकाएं जताई हैं। मंत्रालय का कहना है कि इससे:
ऑनलाइन फ्रॉड और स्कैम बढ़ सकते हैं
फिशिंग और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में इजाफा हो सकता है
पहचान छिपाकर ठगी करना आसान हो जाएगा
सरकारी अधिकारी और संस्थानों की नकल कर धोखाधड़ी हो सकती है
सरकार का मानना है कि फोन नंबर छुप जाने से अपराधियों की पहचान करना मुश्किल होगा, जिससे साइबर सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
WhatsApp के लेटेस्ट अपडेट में यूजर:
सेटिंग्स → अकाउंट → यूजरनेम में जाकर नाम चुन सकेंगे
अगर नाम पहले से लिया गया होगा तो नया चुनना होगा
बिजनेस और सरकारी अकाउंट्स के लिए कुछ यूजरनेम सुरक्षित होंगे
चैट और कॉल में आपका यूजरनेम ही दिखाई देगा (अगर नंबर सेव नहीं है)
मेटा को अब 9 जुलाई तक देना होगा जवाब
सरकार ने मेटा से इस फीचर के सभी तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं पर विस्तृत जवाब मांगा है। अब कंपनी को 9 जुलाई 2026 तक अपना आधिकारिक जवाब सौंपना होगा।


