नई दिल्ली। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले केंद्र की मोदी सरकार संविधान संशोधन से जुड़े अहम विधेयकों, विशेषकर महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे प्रस्तावों को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में भाजपा की नजर अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के शरद पवार गुट के सांसदों पर टिकी हुई है।
शरद पवार गुट में सेंध लगाने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, मानसून सत्र शुरू होने से पहले शरद पवार गुट के छह सांसद एनसीपी (अजित पवार) में शामिल हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि इन सांसदों की पिछले कुछ समय से भाजपा नेतृत्व के साथ बातचीत चल रही है। हालांकि, स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भाजपा सीधे उन्हें शामिल करने के बजाय एनसीपी (अजित) के जरिए राजनीतिक रणनीति पर काम कर रही है।
अन्य दलों से भी संपर्क में सरकार
सरकार केवल एनसीपी तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक द्रमुक, झामुमो, वाईएसआर कांग्रेस और कुछ निर्दलीय सांसदों से भी समर्थन या मतदान के दौरान सहयोग को लेकर बातचीत की जा रही है। बताया जा रहा है कि द्रमुक के साथ कई दौर की चर्चा हो चुकी है और मानसून सत्र शुरू होने से पहले अंतिम दौर की बातचीत भी हो सकती है।
तृणमूल मॉडल पर आगे बढ़ने की तैयारी
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि भाजपा पहले भी तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों में टूट के बाद अप्रत्यक्ष रणनीति अपनाकर अपने पक्ष को मजबूत करने की कोशिश कर चुकी है। इसी तर्ज पर एनसीपी (शरद पवार) के असंतुष्ट सांसदों को एनसीपी (अजित) में शामिल कराने की संभावना जताई जा रही है।
दो-तिहाई बहुमत के लिए कितनी जरूरत?
वर्तमान में लोकसभा में 540 सदस्य हैं। किसी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए लगभग 360 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद भाजपा समर्थक सांसदों की संख्या 324 बताई जा रही है। यदि एनसीपी (शरद पवार) के छह सांसद पाला बदलते हैं तो यह संख्या बढ़कर 330 हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार भाजपा की रणनीति द्रमुक जैसे दलों का प्रत्यक्ष समर्थन हासिल करने के साथ-साथ कुछ विपक्षी दलों को मतदान से दूर रहने के लिए तैयार करने की भी है, ताकि आवश्यक बहुमत का आंकड़ा आसानी से हासिल किया जा सके।


