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    Remittances to India: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच प्रवासी भारतीयों ने भेजे 16 अरब डॉलर, विदेशी मुद्रा भंडार को मिली मजबूती

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    नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में अस्थिरता के बावजूद प्रवासी भारतीयों (NRI) ने भारत को रिकॉर्ड स्तर पर विदेशी मुद्रा भेजी है। वित्त मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारतीय प्रवासियों ने 16 अरब अमेरिकी डॉलर भारत भेजे, जो पिछले वर्ष अप्रैल के 9.4 अरब डॉलर की तुलना में काफी अधिक है।

    विशेषज्ञों को आशंका थी कि पश्चिम एशिया में तनाव के चलते खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीयों की आय और रेमिटेंस (Remittances) प्रभावित हो सकती है, लेकिन ताजा आंकड़ों ने इन सभी आशंकाओं को गलत साबित कर दिया है।

    वित्त वर्ष 2025-26 में बना नया रिकॉर्ड

    रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत को प्रवासी भारतीयों से कुल 155.1 अरब अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। यह वित्त वर्ष 2024-25 के 135.4 अरब डॉलर की तुलना में 14.5 प्रतिशत अधिक है।

    इस बढ़ोतरी के साथ भारत की अर्थव्यवस्था में प्रवासी भारतीयों का योगदान भी बढ़ा है। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में रेमिटेंस की हिस्सेदारी 3.6 प्रतिशत से बढ़कर 4.0 प्रतिशत हो गई है।

    संकट के समय बढ़ता है प्रवासी भारतीयों का सहयोग

    वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि कठिन परिस्थितियों के दौरान प्रवासी भारतीय अपने परिवारों और देश की आर्थिक मदद के लिए अधिक धन भेजते हैं। इसे ‘परोपकार आधारित रेमिटेंस’ का सिद्धांत माना जाता है।

    रिपोर्ट में अर्थशास्त्रियों लुकास और स्टार्क (1985) के अध्ययन का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि जब मूल देश किसी आर्थिक या सामाजिक संकट से गुजरता है, तब प्रवासी भारतीय आर्थिक सहयोग बढ़ा देते हैं।

    कोविड-19 के दौरान भी बढ़ी थी रेमिटेंस

    रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 महामारी सहित पिछले कई वैश्विक संकटों के दौरान भी प्रवासी भारतीयों ने भारत को अधिक धन भेजा था। इससे यह साबित होता है कि आर्थिक अनिश्चितता के समय भी भारतीय प्रवासी अपने परिवारों और देश के प्रति जिम्मेदारी निभाते हैं।

    भारत की अर्थव्यवस्था को मिला बड़ा सहारा

    विशेषज्ञों का मानना है कि रेमिटेंस में लगातार बढ़ोतरी से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार, घरेलू खपत और आर्थिक विकास को मजबूती मिलती है। यही वजह है कि वैश्विक तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था को प्रवासी भारतीयों का मजबूत समर्थन मिलता रहा है।

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