छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में सोमवार को राजनीतिक माहौल उस समय गर्मा गया, जब विधानसभा क्षेत्र के जैतपुर गांव में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायक कमलनाथ को लेकर ‘लापता विधायक’ लिखे पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों में कमलनाथ पर क्षेत्र की समस्याओं से दूरी बनाने और लंबे समय से जनता के बीच नहीं पहुंचने के आरोप लगाए गए हैं।
पोस्टर सामने आने के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो सकती है।
गांवों में लगाए गए कई पोस्टर
जानकारी के अनुसार जैतपुर और आसपास के क्षेत्रों में कई स्थानों पर लगाए गए पोस्टरों में पेयजल संकट, ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत समस्याओं और जनप्रतिनिधि की अनुपस्थिति को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। पोस्टरों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि क्षेत्र की समस्याओं के बावजूद विधायक जनता के बीच सक्रिय नहीं हैं।
भाजपा ने पानी संकट को बनाया बड़ा मुद्दा
स्थानीय भाजपा नेताओं का आरोप है कि छिंदवाड़ा जिले के कई ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से कई गांवों में पानी की समस्या बढ़ गई है, लेकिन विधायक कमलनाथ इस मुद्दे पर सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं।
भाजपा का कहना है कि पोस्टरों के माध्यम से जनता की समस्याओं को सामने लाने और जनप्रतिनिधि का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया है।
कांग्रेस के गढ़ में बढ़ी सियासी हलचल
छिंदवाड़ा लंबे समय से कांग्रेस और कमलनाथ का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है। ऐसे में उनके ही विधानसभा क्षेत्र में ‘लापता विधायक’ के पोस्टर लगना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस अभियान के जरिए कांग्रेस के पारंपरिक प्रभाव को चुनौती देने का प्रयास कर रही है।
ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय
पोस्टर लगाए जाने के बाद जैतपुर और आसपास के गांवों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ ग्रामीण इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि कई लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को नियमित रूप से क्षेत्र का दौरा कर लोगों की समस्याएं सुननी चाहिए।
लोकसभा चुनाव के बाद बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
लोकसभा चुनाव के बाद छिंदवाड़ा में भाजपा अपनी संगठनात्मक गतिविधियों को लगातार तेज कर रही है। दूसरी ओर कांग्रेस भी अपने पारंपरिक जनाधार को मजबूत बनाए रखने की कोशिश में जुटी है। ऐसे में पोस्टर विवाद को आगामी राजनीतिक रणनीति और जनसंपर्क अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि, इस मामले में कांग्रेस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच सियासी बयानबाजी और तेज हो सकती है


