More
    Homeदेशमोहन भागवत बोले- वैश्विक चुनौतियों का समाधान भारतीय दृष्टि में, विश्व कल्याण...

    मोहन भागवत बोले- वैश्विक चुनौतियों का समाधान भारतीय दृष्टि में, विश्व कल्याण के लिए भारत की आवाज सुनना जरूरी

    Published on

    spot_img

    बेंगलुरु। RSS प्रमुख Mohan Bhagwat ने कहा है कि आज दुनिया जिन जटिल चुनौतियों का सामना कर रही है, उनका स्थायी समाधान भारत की समग्र और एकीकृत सोच में निहित है। उनका कहना था कि विश्व कल्याण के लिए भारत की बात सुनी जानी चाहिए, क्योंकि भारतीय दृष्टिकोण सभी प्राणियों के हित और संतुलित विकास पर आधारित है।

    वे बेंगलुरु स्थित Art of Living Foundation के इंटरनेशनल सेंटर में Bharatiya Shikshan Mandal द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘Operationalising NEP 2020: Integration of Indian Knowledge Systems’ के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

    भारतीय दृष्टि दुनिया को दे सकती है नई दिशा

    मोहन भागवत ने कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था कई समस्याओं को केवल सीमित नजरिए से देखती है, इसलिए वह आज की चुनौतियों का पूर्ण समाधान देने में सक्षम नहीं है। इसके विपरीत भारत की संस्कृति और ज्ञान परंपरा जीवन को समग्र रूप से देखने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य केवल अपने विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी मानवता और समस्त जीव-जगत के कल्याण का मार्ग दिखाना भी है।

    विविधता को स्वीकार करना ही भारतीय सोच की ताकत

    आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारतीय दर्शन किसी अन्य विचारधारा को गलत नहीं मानता। प्रत्येक समाज अपने अनुभवों के आधार पर अपनी सोच विकसित करता है और उसका अपना महत्व होता है। भारतीय परंपरा ‘अनेकता में एकता’ और ‘शास्त्रार्थ’ की भावना को बढ़ावा देती है, जहां संवाद और विचार-विमर्श के माध्यम से सत्य की खोज की जाती है। उन्होंने कहा कि सत्य इतना व्यापक है कि उसे किसी एक दृष्टिकोण में सीमित नहीं किया जा सकता।

    भारतीय शिक्षण मंडल की भूमिका की सराहना

    भागवत ने भारतीय शिक्षण मंडल के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संगठन भारतीय शिक्षा प्रणाली की उस अवधारणा पर काम कर रहा है, जिसमें व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास को समान महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण होना चाहिए।

    राजनीतिक दलों से स्वतंत्र रहकर काम करने पर जोर

    उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सामाजिक और शैक्षणिक कार्य राजनीतिक दलों से अलग रहकर अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी कई सामाजिक संगठनों ने इसी सिद्धांत पर काम किया था। कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने भारतीय शिक्षण मंडल की नई वेबसाइट का भी लोकार्पण किया।

    सम्मेलन में देशभर से करीब 380 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन Thawar Chand Gehlot ने किया था।

    Latest articles

    मन, शरीर और आत्मा के लिए क्यों जरूरी है मेडिटेशन?

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक अशांति तेजी से बढ़...

    दतिया उपचुनाव 2026: आशुतोष तिवारी-घनश्याम सिंह के बीच कांटे की टक्कर

    भोपाल। मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इस बार बेहद दिलचस्प...

    NEET प्रदर्शन केस: FIR वापस लेने की तैयारी, 2500 संदिग्धों पर दिल्ली पुलिस की नजर

    साजिश की जांच जारी, CCTV, मोबाइल डेटा और फेस रिकग्निशन से जुटाए जा रहे सबूत नई...

    आज अस्पताल से डिस्चार्ज होंगे सोनम वांगचुक, फिर लौटेंगे लद्दाख

    नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल से छुट्टी...

    More like this

    मन, शरीर और आत्मा के लिए क्यों जरूरी है मेडिटेशन?

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक अशांति तेजी से बढ़...

    दतिया उपचुनाव 2026: आशुतोष तिवारी-घनश्याम सिंह के बीच कांटे की टक्कर

    भोपाल। मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इस बार बेहद दिलचस्प...

    NEET प्रदर्शन केस: FIR वापस लेने की तैयारी, 2500 संदिग्धों पर दिल्ली पुलिस की नजर

    साजिश की जांच जारी, CCTV, मोबाइल डेटा और फेस रिकग्निशन से जुटाए जा रहे सबूत नई...