बजरंग लाल बागड़ा का नाम चर्चा में
लखनऊ। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावा अनियमितता विवाद के बीच संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया तेज होती दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, लंबे समय तक चली चर्चाओं और बढ़ते दबाव के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद छोड़ दिए हैं। अब ट्रस्ट के पुनर्गठन की तैयारियां शुरू हो गई हैं और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा का नाम नए महासचिव के रूप में चर्चा में है।
इस्तीफे का लंबे समय से था इंतजार
सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आने के बाद से ही चंपत राय और अनिल मिश्रा के स्वेच्छा से पद छोड़ने की उम्मीद की जा रही थी। जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें संगठन की ओर से पद छोड़ने का संदेश दिया गया।
बताया जा रहा है कि हाल ही में हरिद्वार में आयोजित विहिप के मार्गदर्शक मंडल की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई। बैठक में मौजूद संतों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने ट्रस्ट की साख बनाए रखने के लिए दोनों नेताओं के इस्तीफे को उचित बताया।
सूत्र: सख्त संदेश के बाद लिया फैसला
सूत्रों का दावा है कि चंपत राय शुक्रवार रात तक पद छोड़ने के पक्ष में नहीं थे। इसके बाद शनिवार को उन्हें शीर्ष स्तर से तत्काल इस्तीफा देने का संदेश दिया गया। यह भी कहा जा रहा है कि यदि उन्होंने स्वयं पद नहीं छोड़ा तो ट्रस्ट की ओर से उन्हें हटाने की कार्रवाई सार्वजनिक की जा सकती थी।
सूत्रों के अनुसार, चंपत राय अब इस महीने के अंत तक आने वाली एसआईटी रिपोर्ट के बाद मीडिया के सामने अपना पक्ष रख सकते हैं।
ट्रस्ट के पुनर्गठन की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, अगले महीने दूसरे सप्ताह में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, चढ़ावे की व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने और श्रद्धालुओं का भरोसा कायम रखने के लिए नए प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है।
बताया जा रहा है कि विवाद से हुई छवि की क्षति की भरपाई के लिए विस्तृत रोडमैप भी तैयार किया जाएगा।
बजरंग लाल बागड़ा का नाम सबसे आगे
ट्रस्ट में संभावित बदलावों के बीच विहिप के महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा का नाम चंपत राय के उत्तराधिकारी के रूप में सामने आ रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट या विश्व हिंदू परिषद की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
यदि यह नियुक्ति होती है तो ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव माना जाएगा।


