तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इजराइल के साथ सैन्य कार्रवाई में सहयोग देने वाले नाटो सदस्य देशों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान ने कहा है कि जिन देशों ने इस अभियान में किसी भी रूप में समर्थन दिया, उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए और उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर कहा कि नाटो महासचिव मार्क रूटे के बयान से यह स्पष्ट होता है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में सहयोग किया था। बघई ने सवाल उठाया कि इन देशों को अपने नागरिकों और पूरी दुनिया को बताना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन क्यों किया।
इस बीच होर्मुज स्ट्रेट में एक वाणिज्यिक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला होने की घटना ने क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, ओमान के तट के पास गुजर रहे जहाज के दाहिने हिस्से पर हमला हुआ, जिससे जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा। हालांकि इस घटना में चालक दल का कोई सदस्य घायल नहीं हुआ और जहाज सुरक्षित आगे बढ़ गया।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा टकराव
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा के लिए नए समुद्री मार्ग (इवैक्यूएशन लेन) बनाने की बात कही गई थी। ईरान का कहना है कि उसकी समुद्री सीमाओं से जुड़े मामलों में बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
दूसरी ओर अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज स्ट्रेट किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं रह सकता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सभी देशों को स्वतंत्र आवाजाही का अधिकार है। इससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा गया है।
ट्रम्प प्रशासन ने मांगी अतिरिक्त सैन्य फंडिंग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने कांग्रेस से 87.6 अरब डॉलर (करीब 8.3 लाख करोड़ रुपये) की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है। यह राशि युद्ध संबंधी खर्च, सेना की तैयारियों और हथियारों के भंडार को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित की गई है।
लेबनान में जारी हैं हमले
लेबनान के नाबातियेह क्षेत्र के पास एक कार पर हुए हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हुआ। इस हमले पर इजराइली सेना की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
अफवाहों का किया खंडन
ईरान सरकार ने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों को भी खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे लगाने या अमेरिकी झंडा जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकार ने कहा कि ऐसी खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं और इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।


