बीजेपी ने बताया राजनीतिक हताशा
भोपाल/नई दिल्ली। उज्जैन में जमीन खरीद-फरोख्त को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कथित जमीन खरीद मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराने की मांग की है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कांग्रेस की राजनीतिक हताशा करार दिया है।
दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष Pawan Khera और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने दावा किया कि उज्जैन में जमीन आवंटन और खरीद के मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के संरक्षण में जमीन से जुड़े फैसले लिए गए और पूरे मामले में भाजपा नेतृत्व की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
वीर भारत न्यास को जमीन आवंटन पर उठाए सवाल
जितू पटवारी ने आरोप लगाया कि उज्जैन में वीर भारत न्यास को कथित तौर पर करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन प्रतीकात्मक राशि पर उपलब्ध कराई गई। उन्होंने पूछा कि इस आवंटन का आधार क्या था और इससे जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री के परिवार द्वारा हाल के वर्षों में खरीदी गई जमीनों और उनकी आय के स्रोतों पर भी स्पष्टीकरण मांगा।
कांग्रेस ने मांग की कि राज्य सरकार वर्ष 2023 के बाद हुए भूमि क्रय-विक्रय और विकास परियोजनाओं से संबंधित सभी तथ्यों पर श्वेत पत्र जारी करे, ताकि जनता के सामने पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके।
‘इंसाइडर ट्रेडिंग’ जैसी स्थिति का आरोप
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि उज्जैन के मास्टर प्लान और भविष्य की विकास योजनाओं से जुड़ी संवेदनशील जानकारी का लाभ उठाकर जमीनों की खरीद की गई। उन्होंने इस स्थिति की तुलना शेयर बाजार में होने वाली “इंसाइडर ट्रेडिंग” से करते हुए कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि के पास उपलब्ध गोपनीय जानकारी का उपयोग निजी लाभ के लिए किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
बीजेपी का पलटवार, आरोपों को बताया बेबुनियाद
कांग्रेस के आरोपों पर जवाब देते हुए मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री Chaitanya Kashyap ने कहा कि मुख्यमंत्री की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जिस ट्रस्ट का उल्लेख कांग्रेस कर रही है, वह सरकारी स्वरूप का संस्थान है और उसके संबंध में लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
काश्यप ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस मुद्दाविहीन हो गई है और राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे आरोप लगा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को पहले अपने नेताओं पर लगे आरोपों पर जवाब देना चाहिए।
जांच की मांग के साथ बढ़ा राजनीतिक तापमान
उज्जैन जमीन विवाद को लेकर कांग्रेस लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा बता रही है। आने वाले दिनों में यह मामला मध्य प्रदेश की राजनीति में प्रमुख मुद्दा बन सकता है। फिलहाल दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और विपक्ष पूरे मामले की स्वतंत्र एवं न्यायिक जांच की मांग कर रहा है।


