नई दिल्ली। केंद्र सरकार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह के बाद हुई यह मुलाकात राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। इसके बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बदलाव की अटकलों ने और जोर पकड़ लिया है।
सूत्रों के अनुसार, आगामी दिनों में मोदी सरकार अपने मंत्रिमंडल में कुछ अहम बदलाव कर सकती है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच हुई मुलाकात को इसी संभावित फेरबदल से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चाओं को उस समय और बल मिला, जब केरल से भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया है।
इसी तरह रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल भी 21 जून को समाप्त हो चुका है। पार्टी ने उन्हें भी पुनः राज्यसभा नहीं भेजा है, जिससे उनके मंत्रिमंडल में बने रहने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में कई केंद्रीय मंत्रियों को उनके गृह राज्यों में संगठनात्मक और राजनीतिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। ऐसे में सरकार और संगठन के बीच संतुलन बनाने के लिए मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावना बढ़ गई है।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के बाद मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में यह पहला बड़ा मंत्रिमंडलीय फेरबदल हो सकता है। ऐसे में नए चेहरों को मौका मिलने और कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब राजनीतिक नजरें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि संभावित फेरबदल से न केवल सरकार की कार्यशैली बल्कि आगामी राज्यों के चुनावों की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।


