चार दिन बाद सुरक्षित मिला मासूम, पातालकोट एक्सप्रेस से पहुंच गया था मथुरा
भोपाल। राजधानी भोपाल से लापता हुआ छह वर्षीय अंश आखिरकार चार दिन बाद उत्तर प्रदेश के मथुरा रेलवे स्टेशन पर सुरक्षित मिल गया। शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र के वाजपेयी नगर मल्टी में रहने वाला अंश करीब 600 किलोमीटर दूर अकेला पहुंच गया था। बच्चे की तलाश में जुटी पुलिस की विशेष टीम ने 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले और 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को सर्च ऑपरेशन में लगाया गया था।
पुलिस के अनुसार, 16 जून को अंश अपनी मां के साथ अस्पताल गया था। उसकी मां पीलिया का इलाज कराने के लिए रॉयल मार्केट स्थित अस्पताल में भर्ती थीं। इसी दौरान किसी बात को लेकर पहले सौतेले पिता और बाद में मां ने उसे डांट दिया। इससे आहत होकर अंश अस्पताल से बाहर निकल गया और बिना किसी को बताए भटकते-भटकते भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंच गया।
लोगों को ट्रेन में चढ़ते देखा, खुद भी बैठ गया
काउंसलिंग के दौरान अंश ने पुलिस को बताया कि रेलवे स्टेशन पर वह काफी देर तक लोगों को ट्रेनों में चढ़ते हुए देखता रहा। जब एक ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुकी और यात्री उसमें सवार होने लगे तो वह भी उनके पीछे-पीछे ट्रेन में चढ़ गया। अंश ने बताया कि उसके मन में कहीं जाने की कोई योजना नहीं थी। वह केवल नाराज होकर घर से निकल आया था।
जांच में सामने आया कि अंश पातालकोट एक्सप्रेस में सवार होकर मथुरा पहुंच गया था, जहां उसे रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी ने ट्रेन के एक डिब्बे में अकेले बैठे हुए बरामद किया।
CCTV फुटेज से मिला अहम सुराग
पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम गठित की गई थी। लगातार 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद यह पता चला कि बच्चा उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाली ट्रेन में सवार हुआ है। इसके बाद विभिन्न राज्यों की पुलिस और रेलवे एजेंसियों को अलर्ट किया गया।
संदिग्ध व्यक्ति के साथ दिखने से बढ़ी थी चिंता
जांच के दौरान एक सीसीटीवी फुटेज में अंश एक संदिग्ध व्यक्ति के साथ दिखाई दिया था, जिससे अपहरण की आशंका भी जताई गई थी। हालांकि बाद में पता चला कि वह व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ था और मामले से उसका कोई संबंध नहीं था।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बच्चे के अपहरण का कोई एंगल सामने नहीं आया है। अंश केवल नाराज होकर घर से निकला था और बिना किसी निश्चित गंतव्य के ट्रेन में बैठ गया था।
यह घटना एक बार फिर अभिभावकों के लिए चेतावनी है कि बच्चों की भावनाओं और गतिविधियों पर लगातार ध्यान देना कितना जरूरी है।


