नई दिल्ली। मप्र राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के मामले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) मुख्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में पार्टी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
प्रेस वार्ता को मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार तथा राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने संबोधित किया। इस दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और विधायक भी मौजूद रहे। हरीश चौधरी ने कहा कि देश में संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता लगातार कमजोर हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में किए गए बदलावों के बाद उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन सभी नियमों के अनुरूप भरा गया था, लेकिन इसके बावजूद उसे निरस्त कर दिया गया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे मामले में उनका रवैया पक्षपातपूर्ण दिखाई दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं और विधायकों द्वारा आपत्ति दर्ज कराने तथा चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर चिंताएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र संस्थाओं का निष्पक्ष और पारदर्शी बने रहना आवश्यक है।
राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन को लेकर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि फॉर्म-26 में मांगी गई सभी जानकारियां पूरी पारदर्शिता के साथ दी गई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस निजी शिकायत का उल्लेख किया जा रहा है, उस पर न्यायालय ने अभी तक संज्ञान नहीं लिया है और फॉर्म में ऐसी जानकारी देने का कोई अनिवार्य प्रावधान भी नहीं था। उन्होंने कहा कि उनके नामांकन पत्र में कोई त्रुटि नहीं थी और न ही किसी तथ्य को छिपाया गया था। कांग्रेस नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।


