वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने उनके खिलाफ महाभियोग की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी का आरोप है कि ट्रम्प ने राष्ट्रपति पद की शक्तियों का इस्तेमाल अपने परिवार और करीबियों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए किया। डेमोक्रेट्स अब उनके कारोबारी हितों और सरकारी फैसलों की जांच कराने की तैयारी में हैं।
समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, डेमोक्रेटिक सांसद रॉबर्ट गार्सिया ने कहा है कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि राष्ट्रपति रहते हुए ट्रम्प और उनके परिवार की संपत्ति में किस तरह बढ़ोतरी हुई। जांच के दायरे में ट्रम्प के बेटों और दामाद जेरेड कुशनर के कारोबारी सौदे भी होंगे।
गार्सिया ने जांच के लिए पांच प्रमुख मुद्दे तय किए हैं। इनमें ट्रम्प परिवार के व्यावसायिक सौदे, जेफ्री एपस्टीन मामले में ट्रम्प प्रशासन की भूमिका और अमेरिकी आव्रजन एजेंसी (आईसीई) की छापेमारी तथा कार्रवाई शामिल हैं। डेमोक्रेट्स का मानना है कि सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल और प्रशासनिक फैसलों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स को बहुमत
मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने अमेरिकी संसद का राजनीतिक समीकरण बदल दिया है। प्रतिनिधि सभा की 435 सीटों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने 242 और रिपब्लिकन पार्टी ने 151 सीटें जीती हैं, जबकि 42 सीटों पर मतगणना जारी है। सीनेट में भी डेमोक्रेट्स की स्थिति मजबूत हुई है। 100 सदस्यीय सदन में उनके पास 54 सीटें हैं, जबकि रिपब्लिकन के पास 44 सीटें हैं। गवर्नर चुनाव में भी डेमोक्रेट्स ने बढ़त बनाई है।
पहले भी दो बार महाभियोग का सामना कर चुके हैं ट्रम्प
ट्रम्प के खिलाफ उनके पहले कार्यकाल में भी दो बार महाभियोग की कार्रवाई हुई थी। पहली बार 2019 में यूक्रेन को सैन्य सहायता रोककर वहां के राष्ट्रपति पर जो बाइडेन के खिलाफ जांच का दबाव बनाने का आरोप लगा था। दूसरी बार जनवरी 2021 में कैपिटल हिंसा के बाद समर्थकों को उकसाने के आरोप में महाभियोग लगाया गया था। हालांकि, दोनों ही मामलों में सीनेट ने उन्हें बरी कर दिया था।
महाभियोग के लिए क्या है संवैधानिक प्रक्रिया?
अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में महाभियोग प्रस्ताव साधारण बहुमत से पारित हो सकता है। इसके बाद मामला सीनेट में जाता है, जहां राष्ट्रपति को दोषी ठहराने और पद से हटाने के लिए दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। इस तरह प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलने के बावजूद ट्रम्प को पद से हटाना डेमोक्रेट्स के लिए आसान नहीं होगा। सीनेट में आवश्यक समर्थन जुटाना उनकी सबसे बड़ी चुनौती रहेगी।


