कर्मचारी की फोटो, पहचान और पते का रिकॉर्ड देना होगा परिजनों को; बिना सूचना कर्मचारी बदलने पर होगी कार्रवाई
भोपाल। घर में बुजुर्गों, बीमारों, दिव्यांगों और अकेले रहने वाले लोगों की देखभाल के लिए केयरटेकर, नर्सिंग अटेंडेंट या घरेलू सहायक रखने से पहले अब उनकी पहचान और पुलिस सत्यापन जरूरी होगा। मध्यप्रदेश सरकार इस संबंध में नया कानून लाने जा रही है। वहीं, भोपाल पुलिस कमिश्नरेट ने फिलहाल सख्ती बरतते हुए निजी एजेंसियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत एजेंसियों को अपने प्रत्येक कर्मचारी का पुलिस वेरिफिकेशन कराना होगा और उसकी पूरी जानकारी मरीज या परिजनों को पहले ही देनी होगी।
पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। आदेश अगले दो महीने तक प्रभावी रहेगा। उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, घरों में देखभाल के लिए रखे जाने वाले कर्मचारियों को परिवार के सदस्यों के साथ ही घर के सामान, कीमती वस्तुओं और कई बार बैंकिंग संबंधी जानकारियों तक पहुंच मिल जाती है। ऐसे में उनका सत्यापन नहीं होना सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। चोरी, धोखाधड़ी, मारपीट, अवैध वसूली और बुजुर्गों के शोषण जैसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस ने एजेंसियों की जवाबदेही तय की है।
कर्मचारी बदलने पर भी देनी होगी जानकारी
नए निर्देशों के मुताबिक, एजेंसी को कर्मचारी भेजने से पहले उसका नाम, फोटो, पहचान, सेवा का प्रकार, संभावित समय और संपर्क नंबर मरीज या अधिकृत परिजन को देना होगा। किसी कर्मचारी की छुट्टी या अनुपस्थिति के कारण दूसरा कर्मचारी भेजने पर भी पहले सूचना देनी होगी। नए कर्मचारी का पुलिस सत्यापन भी अनिवार्य होगा।
दूसरे राज्यों के कर्मचारियों का भी सत्यापन
एजेंसियों को कर्मचारियों का पूरा नाम, जन्मतिथि, स्थायी और वर्तमान पता, मोबाइल नंबर, पहचान दस्तावेज तथा हाल का फोटो संबंधित थाने में उपलब्ध कराना होगा। दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले कर्मचारियों के पते की पुष्टि भी जरूरी होगी। उनके पूर्व रोजगार और अनुभव की जानकारी भी जांची जा सकेगी।
एजेंसियों को रखना होगा कर्मचारियों का रिकॉर्ड
निजी एजेंसियों को अपने कार्यालय का पता, संपर्क नंबर, ई-मेल और शिकायत अधिकारी का विवरण सार्वजनिक करना होगा। पंजीयन या लाइसेंस भी कार्यालय में प्रदर्शित करना होगा। प्रत्येक कर्मचारी की नियुक्ति, कार्यस्थल, सेवा अवधि और सेवा समाप्ति का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। मरीज के घर कर्मचारी के आने-जाने का समय भी दर्ज करना होगा। बिना अनुमति किसी अनधिकृत व्यक्ति को मरीज के घर ले जाने पर रोक रहेगी।
घटना छिपाने पर एजेंसी भी जिम्मेदार
किसी घर में चोरी, धोखाधड़ी, मारपीट, जबरन वसूली, संदिग्ध मौत, गुमशुदगी या यौन अपराध की जानकारी मिलने पर एजेंसी को तत्काल पुलिस को सूचना देनी होगी। व्यावसायिक प्रतिष्ठा बचाने के लिए घटना छिपाने या आपराधिक शिकायत को आंतरिक मामला बताकर दबाने की अनुमति नहीं होगी। कर्मचारियों को मरीजों की निजता, सम्मान और सुरक्षा के प्रति प्रशिक्षित करना भी एजेंसी की जिम्मेदारी होगी।


