काठमांडू। Nepal Flood नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन से बनी दो नई झीलों के कारण एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। इनमें से एक झील से लगातार पानी रिस रहा है, जबकि दूसरी झील का आकार बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों ने दोनों जलाशयों की निगरानी तेज कर दी है।
बुधवार को इसी क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। तेज बहाव अपने साथ कीचड़, रेत, बजरी और बड़ी-बड़ी चट्टानें बहाकर निचले इलाकों में ले गया था।
नेपाल और तिब्बत में बाढ़ और भूस्खलन से मृतकों की संख्या 633 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। वहीं करीब 2,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें लगभग 320 भारतीय नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा करीब 400 भारतीयों के तिब्बत में फंसे होने की जानकारी है।
नेपाल में 626 लोगों की मौत
नेपाल पुलिस के अनुसार, देश में बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 626 लोगों की मौत हो चुकी है। इससे पहले मृतकों की संख्या 579 बताई गई थी। वहीं करीब 2,000 लोग अब भी लापता बताए गए हैं।
राहत और बचाव अभियान जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े लगातार बदल रहे हैं। अलग-अलग सरकारी एजेंसियों की ओर से जारी आंकड़ों में भी अंतर देखा जा रहा है।
दो झीलों से फिर बाढ़ का खतरा
नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन के बाद बनी दोनों झीलों को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों के मुताबिक, एक झील से पानी लगातार बाहर निकल रहा है, जबकि दूसरी में पानी का स्तर बढ़ रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों से दोनों झीलों की निगरानी की जा रही है। अब निचले हिस्सों में कैमरे और सेंसर लगाने की तैयारी है, ताकि पानी के स्तर में होने वाले बदलाव की तत्काल जानकारी मिल सके।
चीन ने भी पानी का स्तर बढ़ने के बाद शुक्रवार को राहत अभियान रोक दिया था। अधिकारियों को आशंका थी कि झीलों में पानी बढ़ने से दोबारा बाढ़ या भूस्खलन हो सकता है।
तिब्बत में 554 लोग लापता
चीनी सरकारी मीडिया ने तिब्बत में बाढ़ से हुई तबाही की नई तस्वीरें जारी की हैं। तस्वीरों में नेपाल-चीन सीमा के पास का इलाका कीचड़ और चट्टानों से पटा हुआ दिखाई दे रहा है।
सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल ग्यिरोंग पोर्ट तक पहुंचने के लिए रेस्क्यू टीम को पहाड़ों, चट्टानों और तेज बहाव वाली नदियों को पार करना पड़ा। सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार यह इलाका बुरी तरह तबाह हुआ है।
चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, तिब्बत में 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 554 लोग अब भी लापता हैं।
नेपाल में राहत कोष में 4.38 अरब नेपाली रुपये जमा
बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित लोगों की मदद के लिए बनाए गए नेपाल के प्रधानमंत्री राहत कोष में अब तक 4.38 अरब नेपाली रुपये जमा हो चुके हैं। यह रकम करीब 274 करोड़ भारतीय रुपये के बराबर है।
इसके अलावा दो बैंकों में करीब 6.8 लाख अमेरिकी डॉलर भी जमा किए गए हैं। यह राशि करीब 10.38 करोड़ नेपाली रुपये के बराबर बताई गई है।
भारत-चीन से 42 बेली ब्रिज की मांग
बाढ़ में कई पुल बह जाने के कारण नेपाल सरकार ने सड़क और परिवहन व्यवस्था बहाल करने के लिए भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज बनाने में मदद मांगी है।
बाढ़ से रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में बड़ी संख्या में पुल क्षतिग्रस्त या बह गए हैं। इससे लोगों और वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
भारत ने नेपाल को जरूरत पड़ने पर बेली ब्रिज सहित हर संभव मदद देने का भरोसा दिया है।
भारत ने भेजी 57.5 टन राहत सामग्री
भारत ने नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अब तक 57.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री भेजी है। शुक्रवार रात राहत सामग्री की 10 टन की एक और खेप काठमांडू पहुंची।
इसके साथ 11 सदस्यीय मेडिकल और सुरंग बचाव टीम भी नेपाल भेजी गई है। टीम में डॉक्टर, पैरामेडिकल कर्मचारी और विशेषज्ञ शामिल हैं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारतीय टीमें नेपाल पहुंचकर राहत और बचाव अभियान में जुट गई हैं। उन्होंने नेपाल की सेना द्वारा 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए आभार जताया।
नेपाल से 84 भारतीयों का रेस्क्यू
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में बाढ़ के बाद अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग भी शामिल हैं, जो शुक्रवार को भारत लौट आए।
इसके अलावा त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 63 मजदूरों को भी सुरक्षित निकाला गया है।
वहीं चीन की तरफ भारत-नेपाल सीमा पर फंसे 53 भारतीय नागरिक काठमांडू पहुंच चुके हैं। इनमें महाराष्ट्र के 37 लोग शामिल हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटते समय तिब्बत में फंस गए थे।
महाराष्ट्र सरकार के अनुसार करीब 395 नागरिक अब भी फंसे हुए हैं। इनमें से 325 लोगों से संपर्क हो चुका है और उन्हें सुरक्षित बताया गया है।
करीब 90 अमेरिकी नागरिक भी लापता
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार नेपाल और चीन में आई बाढ़ के बाद करीब 90 अमेरिकी नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है। पांच अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। अभी तक किसी अमेरिकी नागरिक की मौत की जानकारी नहीं मिली है।
अमेरिका ने नेपाल के लिए 5 लाख डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है। राहत सामग्री लेकर पहली खेप भी नेपाल के लिए रवाना की जा चुकी है।
चार फ्रांसीसी नागरिकों की तलाश जारी
बाढ़ के बाद चार फ्रांसीसी नागरिक अब भी लापता हैं। फ्रांस के विदेश मंत्रालय के अनुसार बाढ़ के समय नेपाल-तिब्बत सीमा पर 80 फ्रांसीसी नागरिक मौजूद थे। इनमें से 76 लोगों के बारे में जानकारी मिल चुकी है, जबकि चार की तलाश जारी है।
नेपाल में 13 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी रेस्क्यू में जुटे
नेपाल सरकार के मुताबिक राहत और बचाव अभियान में 13,295 सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। इनमें 7,250 नेपाल पुलिस, 4,200 नेपाली सेना और 1,845 आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवान शामिल हैं।
सरकार के अनुसार अब तक 3,253 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। प्रभावित इलाकों में हेलिकॉप्टर के जरिए एयरलिफ्ट, राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर गांवों को खाली कराने की कार्रवाई जारी है।
चीन ने नेपाल को हरसंभव मदद का भरोसा दिया
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को शोक संदेश भेजकर आपदा में हुए जान-माल के नुकसान पर संवेदना जताई है। उन्होंने कहा कि चीन लापता लोगों की तलाश और घायलों के इलाज के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।
चीन ने नेपाल के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव और पुनर्निर्माण में सहयोग का भरोसा दिया है।
आंकड़ों में अंतर क्यों?
नेपाल में मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। इसका प्रमुख कारण राहत और बचाव अभियान का लगातार जारी रहना है। नए शव मिलने और लापता लोगों का पता चलने के साथ आंकड़े बदल रहे हैं।
तिब्बत में स्थिति की स्वतंत्र जानकारी जुटाना भी मुश्किल है, क्योंकि वहां बाहरी मीडिया की पहुंच सीमित है। इसलिए वहां की स्थिति से संबंधित अधिकांश जानकारी चीनी सरकारी मीडिया और अधिकारियों के बयानों पर आधारित है।


