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    नेपाल बाढ़ में 804 मौतें: अज्ञात शवों का सामूहिक दफन शुरू, सैकड़ों कब्रें तैयार; 3 हजार अब भी लापता

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    काठमांडू। नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। बाढ़ और ग्लेशियर टूटने से आई तबाही में जान गंवाने वाले अज्ञात लोगों के शवों का सामूहिक दफन शुरू कर दिया गया है। चितवन के देवघाट जंगल में प्रशासन ने सैकड़ों कब्रें तैयार की हैं। यहां उन शवों को दफनाया जा रहा है, जिनकी अब तक पहचान नहीं हो सकी है और जो लंबे समय तक पड़े रहने के कारण खराब होने लगे हैं।

    प्रशासन के मुताबिक, पिछले दो दिनों में 196 अज्ञात शवों को दफनाया जा चुका है। कई शव इतनी खराब स्थिति में मिले हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में प्रत्येक शव को एक पहचान नंबर दिया जा रहा है और उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा रहा है। बाद में डीएनए जांच के जरिए शवों की पहचान करने की कोशिश की जाएगी।

    इस बीच 3 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों के परिजन राहत और बचाव दलों के साथ मिलकर अपनों की तलाश कर रहे हैं।

    ग्लेशियर टूटने से आई थी अचानक बाढ़

    26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर टूटने के बाद नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक बाढ़ आ गई थी। इस आपदा में नेपाल में अब तक 788 मौतों की जानकारी दी गई थी, जबकि तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई थी। ताजा आंकड़ों में कुल मृतकों की संख्या 804 बताई जा रही है।

    बाढ़ के बाद नेपाल के कई इलाकों में सड़क, बिजली और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और कई इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान जारी है।

    चीन पर जानकारी साझा नहीं करने के आरोप

    इस त्रासदी से पहले ग्लेशियरों से जुड़े खतरे की जानकारी साझा करने को लेकर चीन पर सवाल उठ रहे हैं। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, 27 मई को नेपाल और चीन के अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी। इस दौरान नेपाल ने ग्लेशियरों में शुरुआती हलचल और जलस्तर से संबंधित जानकारी समय पर साझा करने का अनुरोध किया था।

    नेपाली अधिकारियों का आरोप है कि चीन की ओर से उन्हें उतनी जानकारी नहीं मिली, जितनी वे चाहते थे। हालांकि, इस दावे पर चीन की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आई, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

    90 फीसदी प्रभावित इलाकों में बिजली बहाल

    बाढ़ से बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय ने बिजली बहाली के साथ वैकल्पिक ऊर्जा की व्यवस्था भी शुरू की है। मंत्रालय के अनुसार, नुवाकोट के करीब 90 प्रतिशत प्रभावित इलाकों में बिजली बहाल की जा चुकी है। रसुवा में भी बिजली व्यवस्था बहाल करने का काम तेजी से चल रहा है।

    बिजली और रोशनी की समस्या से निपटने के लिए 2 किलोवाट क्षमता के संस्थागत सोलर सिस्टम और 20 वाट के 500 सोलर सेट की व्यवस्था की गई है। इन्हें वन-डोर सिस्टम के जरिए प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया।

    सीमा पर बनी झील का पानी निकला, खतरा टला

    नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद बनी बैरियर झील का पानी प्राकृतिक बहाव के जरिए निकल गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, झील में जमा पानी लगभग पूरी तरह बाहर निकल चुका है। इससे डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में झील टूटने के कारण अचानक बाढ़ आने का खतरा फिलहाल टल गया है।

    यह झील पिछले सप्ताह ग्लेशियर टूटने के बाद चोचेन खोला और चीन की पुरेपु त्सांगपो नदी के संगम के पास बनी थी। इसमें करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया था।

    दलाई लामा ने पीड़ितों के लिए की प्रार्थना

    तिब्बती आध्यात्मिक गुरु 14वें दलाई लामा ने नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ में जान गंवाने वालों और प्रभावित परिवारों के लिए प्रार्थना की। लेह के शेवात्सेल टीचिंग ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने मृतकों, लापता लोगों और प्रभावित परिवारों के लिए प्रार्थना की।

    उनकी मौजूदगी में लोगों ने पीड़ितों की स्मृति और प्रभावित परिवारों के कल्याण के लिए अवलोकितेश्वर मंत्र का जाप किया। दलाई लामा ने इससे पहले 27 अगस्त को भी आपदा पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों और प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की थी।

    चितवन में 264 शव बरामद

    नेपाल के चितवन क्षेत्र में अब तक 264 शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें कई शवों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। शवों की पहचान के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ विशेषज्ञ टीमें भी काम कर रही हैं।

    नेपाल पहुंची भारतीय फोरेंसिक टीम

    बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल के राहत एवं बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम काठमांडू पहुंचकर काम शुरू कर चुकी है। टीम डीएनए सैंपल की जांच के जरिए मृतकों की पहचान में नेपाली अधिकारियों की मदद कर रही है।

    इसके अलावा भारतीय टनल रेस्क्यू टीम ने चिलिमे और लांगटांग हाइड्रोपावर परियोजनाओं में नेपाल सेना के सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन में भी सहयोग किया। रिपोर्ट के मुताबिक, इन परियोजनाओं में करीब 898 कर्मचारी अब भी फंसे हुए हैं। राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ लापता लोगों की तलाश और अज्ञात शवों की पहचान का काम भी जारी है।

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