ग्लास्गो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रतियोगिता के छठे दिन दिलीप महादु गावित ने पुरुषों की पैरा टी47 वर्ग की 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर भारत की झोली में तीसरा गोल्ड डाल दिया। उन्होंने 10.71 सेकेंड का समय निकालते हुए पहला स्थान हासिल किया।
इस स्पर्धा में भारत के मोहम्मद बासिल ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 10.83 सेकेंड के साथ रजत पदक अपने नाम किया। इंग्लैंड के केविन सैंटोस ने 10.85 सेकेंड का समय लेकर कांस्य पदक जीता।
क्या है टी47 (T47) कैटेगरी?
टी47 (T47) वर्ग उन पैरा एथलीटों के लिए निर्धारित है, जिनके एक या दोनों हाथों में शारीरिक अक्षमता होती है। इसमें हाथ के किसी हिस्से की कमी या हाथ की कार्यक्षमता प्रभावित होने वाले खिलाड़ी भाग लेते हैं।
भारत का तीसरा गोल्ड
दिलीप गावित से पहले भारत के लिए महिलाओं की पैरा शॉटपुट एफ57 स्पर्धा में शर्मिला धनकड़ और 48 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। गावित के गोल्ड के साथ भारत के खाते में अब तीन स्वर्ण पदक हो गए हैं।
मुरली श्रीशंकर ने फिर रचा इतिहास
भारतीय स्टार लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने 8.09 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता। इसके साथ ही वह लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की लॉन्ग जंप स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए।
इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जमैका के तजय गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर जीता।
मेडल टैली में भारत की वापसी
छठे दिन के मुकाबलों के बाद भारत के खाते में 3 स्वर्ण, 9 रजत और 3 कांस्य सहित कुल 15 पदक हो गए हैं। इस प्रदर्शन के दम पर भारतीय दल ने एक बार फिर मेडल तालिका में आठवां स्थान हासिल कर लिया है। इससे पहले पांचवें दिन भारत नौवें स्थान पर खिसक गया था।
वहीं, ऑस्ट्रेलिया 47 स्वर्ण सहित कुल 103 पदकों के साथ तालिका में शीर्ष पर बना हुआ है।
बॉक्सिंग में 10 पदक लगभग तय
भारतीय मुक्केबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पदकों की उम्मीद बढ़ा दी है। बुधवार को छह और मुक्केबाज सेमीफाइनल में पहुंच गए, जिससे बॉक्सिंग में भारत के 10 पदक लगभग सुनिश्चित हो गए हैं।
सेमीफाइनल में पहुंचने वाले प्रमुख भारतीय मुक्केबाज
- जैस्मिन लैम्बोरिया (57 किग्रा) ने इंग्लैंड की इलिस ग्लिन को 4-1 से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई।
- अरुंधति (70 किग्रा) ने न्यूजीलैंड की मॉर्गन एंडरसन को 3-1 से हराया।
- साक्षी चौधरी (51 किग्रा) ने नॉर्दर्न आयरलैंड की कैथलीन फ्रेयर को 5-0 से मात दी।
- नरेंद्र बेरवाल (90 किग्रा) ने समोआ के माइकल सेको को 3-2 से हराया।
- अंकुश पंघाल (80 किग्रा) ने सेशेल्स के जे. मिकॉक को 5-0 से हराया।
- सचिन (70 किग्रा) ने बोत्सवाना के ट्रेजर मोरेमी को 5-0 से शिकस्त दी।
इससे पहले लवलीना बोरगोहेन, प्रीति पवार, प्रिया घंगस और जादुमणि सिंह भी सेमीफाइनल में पहुंचकर अपने पदक पक्के कर चुके हैं।
बॉक्सिंग में क्यों पक्का हो जाता है मेडल?
कॉमनवेल्थ गेम्स की बॉक्सिंग प्रतियोगिता में तीसरे स्थान के लिए अलग मुकाबला नहीं होता। इसलिए जो खिलाड़ी सेमीफाइनल तक पहुंच जाते हैं, वे कम से कम कांस्य पदक के हकदार बन जाते हैं। सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों खिलाड़ियों को संयुक्त रूप से कांस्य पदक दिया जाता है।
भारत का यह प्रदर्शन संकेत देता है कि आगामी दिनों में देश के पदकों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।


