भोलेनाथ की आराधना का सबसे पवित्र महीना श्रावण (सावन) माना जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों में श्रावण मास को भगवान शिव की उपासना, तपस्या और आध्यात्मिक साधना का विशेष समय बताया गया है। इस महीने में शिवलिंग का अभिषेक, रुद्राभिषेक, सोमवार व्रत और महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि श्रावण मास में भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। यही कारण है कि इस महीने में महिलाएं और विशेष रूप से कुंवारी कन्याएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर मनचाहे जीवनसाथी और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
शास्त्रों में श्रावण मास का महत्व
शिव पुराण में भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया है कि शिव आराधना करने वाले भक्तों पर भगवान भोलेनाथ कृपा करते हैं। श्रावण मास में जलाभिषेक और मंत्र जाप को विशेष पुण्यदायी माना गया है।
वहीं स्कंद पुराण में भी श्रावण मास को भगवान शिव की भक्ति और व्रत-उपवास के लिए श्रेष्ठ बताया गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। इस घटना के बाद देवताओं ने भगवान शिव का जल से अभिषेक किया। इसी कारण सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा मानी जाती है।
कुंवारी कन्याएं क्यों रखती हैं सावन सोमवार व्रत?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
इसी कथा के आधार पर कुंवारी लड़कियां सावन के सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव जैसे गुणों वाले जीवनसाथी की कामना करती हैं।
कई स्थानों पर कन्याएं 16 सोमवार व्रत भी रखती हैं, जिसकी परंपरा शिव भक्ति से जुड़ी मानी जाती है।
सावन सोमवार पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
1. सुबह स्नान और संकल्प
- सूर्योदय से पहले उठकर घर की साफ-सफाई करें।
- स्नान के जल में गंगाजल या काले तिल डालना शुभ माना जाता है।
- स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान शिव का ध्यान करें।
2. शिवलिंग का अभिषेक
शिवलिंग पर जल, दूध, पंचामृत से अभिषेक करें।
इसके बाद अर्पित करें:
- बेलपत्र
- धतूरा
- आक के फूल
- भस्म
- फल और नैवेद्य
3. मंत्र जाप
पूजा के बाद रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से:
“ॐ नमः शिवाय”
मंत्र का जाप करें।
कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना से श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र का जाप करती हैं।
शिव पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
- भगवान शिव को हल्दी अर्पित नहीं की जाती।
- शिव पूजा में तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते।
- बेलपत्र चढ़ाते समय उसकी शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए।
- शिवलिंग पर हमेशा श्रद्धा और शुद्ध मन से जल अर्पित करना चाहिए।
सावन में हरी चूड़ियों का महत्व
सावन में हरियाली और सौभाग्य का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं माता पार्वती की पूजा कर हरी चूड़ियां अर्पित करती हैं।
मान्यता है कि माता पार्वती को हरी चूड़ियां अर्पित करने से वैवाहिक सुख और पारिवारिक खुशहाली की कामना पूरी होती है।
सावन सोमवार की धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था। उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।
इसी कारण सावन मास में शिव-पार्वती की पूजा को दांपत्य सुख, प्रेम और परिवार की खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है।
श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है। इसी समय श्रावणी उपाकर्म, जनेऊ परिवर्तन और पितरों के स्मरण की परंपरा भी निभाई जाती है।


