नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जारी अटकलों के बीच संकेत मिल रहे हैं कि फिलहाल इस प्रक्रिया को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, सरकार का पूरा ध्यान आगामी मानसून सत्र और संसद में महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना अब मानसून सत्र के बाद ही दिखाई दे रही है।
पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री पी.जे. कुरियन के इस्तीफे और प्रधानमंत्री की राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई थीं। हालांकि सत्ता गलियारों से मिल रही जानकारी के मुताबिक सरकार फिलहाल राजनीतिक और संसदीय रणनीति को अधिक प्राथमिकता दे रही है।
दो-तिहाई बहुमत जुटाने की चुनौती
सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता संसद के आगामी मानसून सत्र में कुछ महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयकों को आगे बढ़ाना है। इनमें महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को विशेष रूप से अहम माना जा रहा है। संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है। ऐसे में सरकार विभिन्न क्षेत्रीय और गैर-कांग्रेसी दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार उन दलों से भी संपर्क साध रही है जिन्होंने पहले ऐसे विधेयकों पर आरक्षण या विरोध जताया था। हाल के महीनों में कुछ विपक्षी दलों में हुए राजनीतिक बदलावों और टूट-फूट को भी सरकार अपने पक्ष में संभावित अवसर के रूप में देख रही है।
विपक्षी दलों के समीकरणों पर नजर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार केवल संख्या बल बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राजनीतिक समीकरण तैयार करने पर भी ध्यान दे रही है। संसद में प्रभावी समर्थन सुनिश्चित करने के लिए कई क्षेत्रीय दलों के साथ संवाद जारी है। इससे सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में मदद मिल सकती है।
भाजपा संगठन में जल्द बदलाव संभव
मंत्रिमंडल विस्तार में भले ही देरी हो रही हो, लेकिन भाजपा संगठन में बदलाव की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। पार्टी नेतृत्व नई केंद्रीय टीम के गठन को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। बताया जा रहा है कि कई दौर की चर्चा और मंथन के बाद संभावित नामों की सूची तैयार कर ली गई है। जुलाई के पहले सप्ताह तक भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा हो सकती है।
मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने हाल ही में सफलतापूर्वक आयोजित हुई नीट-यूजी परीक्षा के लिए विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच हुए समन्वित प्रयासों की सराहना की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने और चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए विभागों के बीच मजबूत सहयोग और संवाद आवश्यक है। उन्होंने पश्चिम एशिया संकट जैसे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के दौरान भी विभिन्न मंत्रालयों द्वारा किए गए समन्वय का उल्लेख किया।
राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगा अगला फैसला
विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र के बाद होने वाला मंत्रिमंडल विस्तार केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण होगा। इसमें सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय संतुलन, संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा जा सकता है। इसलिए सरकार फिलहाल जल्दबाजी के बजाय राजनीतिक परिस्थितियों के पूरी तरह स्पष्ट होने का इंतजार कर रही है।


