नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र जैन को दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने मंगलवार को फिर गिरफ्तार किया। दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में जैन समेत छह लोगों को हिरासत में लिया गया है।
जैन के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय, पूर्व कॉन्ट्रैक्चुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव तथा निजी क्षेत्र से जुड़े नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है। ACB का आरोप है कि STP टेंडर की शर्तों में इस तरह बदलाव किए गए, जिससे एक विशेष कंपनी को फायदा मिल सके।
टेंडर की शर्तों में बदलाव का आरोप
ACB की जांच के मुताबिक, दिल्ली जल बोर्ड के STP के अपग्रेडेशन और विस्तार से जुड़े टेंडरों में ऐसी शर्तें शामिल की गईं, जिनसे प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई और एक खास कंपनी को लाभ पहुंचाने का रास्ता बना।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिसंबर 2025 में इसी मामले में 14 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। ED के अनुसार, टेंडर की शर्तों को कथित तौर पर इस तरह बदला गया कि Euroteck Environmental Pvt. Ltd. को तकनीकी लाभ मिले। एजेंसी ने करीब 17.70 करोड़ रुपये के कथित अपराध से अर्जित धन का उल्लेख किया था।
उदित प्रकाश राय पर 1.52 करोड़ रुपये की रिश्वत का आरोप
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पूर्व DJB CEO उदित प्रकाश राय पर करीब 1.52 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत लेने का आरोप है। ACB की कार्रवाई में उनके अलावा निजी कंपनियों और सलाहकार से जुड़े अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
ACB का कहना है कि टेंडर दस्तावेजों और अधिकारियों तथा बिचौलियों के बीच कथित बातचीत से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी जांच में सामने आए हैं।
2022 में दिए गए थे STP के टेंडर
यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े उन टेंडरों का है, जिन्हें 2022 में मंजूरी दी गई थी। उस समय सत्येंद्र जैन दिल्ली के जल मंत्री और DJB के अध्यक्ष थे। ED ने अपनी जांच में चार STP टेंडरों को मामले के केंद्र में रखा है।
ED के अनुसार, इन टेंडरों की कुल परियोजना लागत करीब 1,943 करोड़ रुपये थी। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि टेंडर की शर्तों में हेरफेर के जरिए एक कंपनी को अनुचित लाभ मिला और इसके बदले कथित तौर पर अवैध भुगतान किया गया।
2024 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में मिली थी जमानत
सत्येंद्र जैन इससे पहले मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करीब दो साल जेल में रहे थे। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें 30 मई 2022 को गिरफ्तार किया था। दिल्ली की अदालत ने उन्हें अक्टूबर 2024 में जमानत दी थी।
अब STP टेंडर मामले में ACB की गिरफ्तारी के बाद उनकी कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं।
जैन पर पहले भी लगे हैं कई आरोप
सत्येंद्र जैन के खिलाफ इससे पहले आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले भी सामने आ चुके हैं। दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े मामले में ED ने दिसंबर 2025 में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। एजेंसी ने जैन समेत कई लोगों पर कथित मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाया था।
इसके अलावा दिल्ली के CCTV कैमरा प्रोजेक्ट और स्कूल क्लासरूम निर्माण से जुड़े मामलों में भी जैन का नाम जांच के दौरान सामने आया है।
AAP ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया है। AAP नेताओं ने भाजपा पर जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। दूसरी ओर भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जांच एजेंसी ने कथित भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई की है।


