भोपाल। Bank Strike 2026: मध्य प्रदेश में बैंक कर्मचारी आज शुक्रवार को एक दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह यानी 5-डे वीक लागू करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश के करीब 40 हजार बैंक कर्मचारी काम नहीं करेंगे। हड़ताल के कारण प्रदेश की करीब 7 हजार बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित होने की संभावना है। भोपाल में बैंक कर्मचारी एकत्र होकर प्रदर्शन भी करेंगे।
हड़ताल भले ही एक दिन की है, लेकिन इसका असर लगातार तीन दिनों तक देखने को मिल सकता है। शुक्रवार की हड़ताल के बाद शनिवार और रविवार को बैंकिंग अवकाश रहेगा। ऐसे में नियमित बैंकिंग सेवाएं सोमवार से सामान्य होने की संभावना है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले हड़ताल
यह प्रदेशव्यापी हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बैनर तले की जा रही है। इसमें प्रदेश के विभिन्न बैंकों के कर्मचारी शामिल होंगे। बैंक यूनियनों का कहना है कि लंबे समय से 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह समेत कई मांगें लंबित हैं, लेकिन सरकार की ओर से इन पर अपेक्षित निर्णय नहीं लिया गया है।
हड़ताल का सीधा असर बैंक ग्राहकों पर पड़ सकता है। बड़ी रकम की निकासी, चेक जमा करने, चेक क्लियरेंस और अन्य बैंकिंग सेवाओं में देरी हो सकती है। हालांकि डिजिटल बैंकिंग, यूपीआई और एटीएम जैसी सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की संभावना है, लेकिन नकद और शाखा आधारित कामकाज प्रभावित रहेगा।
सरकार से बातचीत बेनतीजा, हड़ताल पर अड़ी यूनियन
हड़ताल से पहले बैंक यूनियनों और सरकार के बीच बातचीत का दौर चला, लेकिन कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद यूनियनों ने प्रस्तावित हड़ताल को पूर्ववत रखने का फैसला किया।
यूनियनों का कहना है कि 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग लंबे समय से लंबित है और इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए।
सितंबर में फिर लगातार पांच दिन बैंक बंद रहने की संभावना
सितंबर में बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित दूसरी हड़ताल का असर और व्यापक हो सकता है। 28 से 30 सितंबर तक हड़ताल प्रस्तावित है, जबकि इससे पहले 26 और 27 सितंबर को शनिवार और रविवार का अवकाश रहेगा। ऐसे में बैंकिंग सेवाओं पर लगातार पांच दिनों तक असर पड़ सकता है।
क्या है 5-डे बैंकिंग वीक की मांग?
फिलहाल बैंकों में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है। बैंक यूनियनों की मांग है कि सभी शनिवार को अवकाश घोषित कर पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू किया जाए।
यूनियनों के प्रस्ताव के मुताबिक शनिवार की छुट्टी की भरपाई सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन करीब 40 मिनट अतिरिक्त काम करके की जा सकती है। यानी सप्ताह में पांच दिन बैंक काम करेंगे और प्रत्येक कार्यदिवस में कामकाज का समय थोड़ा बढ़ाया जाएगा।
बैंक कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
बैंक यूनियनों की मांगें केवल 5-डे वीक तक सीमित नहीं हैं। यूनियनों ने स्केल-I और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू की गई नई पीएलआई (Performance Linked Incentive) योजना को वापस लेने की मांग भी उठाई है।
यूनियनों ने 27 अगस्त को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन किया था और आने वाले महीनों में बैंक हड़तालों के साथ अनिश्चितकालीन राष्ट्रव्यापी हड़ताल की चेतावनी भी दी है।
यूनियन बोली- जायज मांग को अनावश्यक रूप से लंबित रखा
यूनियन के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा के मुताबिक, पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की जायज मांग को सरकार अनावश्यक रूप से लंबित कर रही है। उनका आरोप है कि अधिकारियों के लिए नई पीएलआई योजना पर भी कर्मचारियों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया है।
यूनियन का कहना है कि योजना से कर्मचारियों के बीच असमानता बढ़ सकती है और व्यक्तिगत प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन को बढ़ावा मिलेगा।
पेंशन अपडेट से लेकर भर्ती तक कई मुद्दे लंबित
बैंक यूनियनों के अनुसार पेंशन अपडेट, पेंशनभोगियों के एक्स-ग्रेशिया की समीक्षा, पेंशन संबंधी विसंगतियों को दूर करने और सभी पेंशनभोगियों के लिए समान व्यवस्था लागू करने जैसे मुद्दे भी लंबित हैं।
इसके अलावा पर्याप्त संख्या में क्लर्क, सब-स्टाफ और आर्म्ड गार्ड्स की भर्ती, ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत सीमा बढ़ाने समेत कई मांगों पर भी निर्णय नहीं हुआ है।
यूनियनों का आरोप है कि इन लंबित मुद्दों का समाधान किए बिना सरकार अगले वेतन संशोधन समझौते को जल्द पूरा करने की कोशिश कर रही है।
पीएलआई योजना का भी विरोध
यूनियनों ने स्केल-I और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए प्रस्तावित पीएलआई योजना का भी विरोध किया है। उनका आरोप है कि योजना से बैंक कर्मचारियों के बीच विभाजन पैदा हो सकता है और अधिकारियों के एक छोटे वर्ग को अनुपातहीन रूप से अधिक प्रोत्साहन राशि का लाभ मिलेगा।
बैंक यूनियनों का कहना है कि वेतन, पेंशन, भर्ती और कामकाजी परिस्थितियों से जुड़े लंबित मुद्दों पर ठोस समाधान नहीं निकलने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।


