नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सत्र के आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही महज एक मिनट चली। वहीं, राज्यसभा करीब एक घंटे छह मिनट तक चली। लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्रिपरिषद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी मौजूद रहे। वंदे मातरम् के गान के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।
राज्यसभा में खनिज विधेयक पारित
राज्यसभा में अंतिम दिन माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 पारित किया गया। इसके बाद वंदे मातरम् के साथ राज्यसभा की कार्यवाही भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
हल्द्वानी में मंच के ‘शुद्धिकरण’ का मुद्दा उठा
राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी में उनके कार्यक्रम के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण का मुद्दा उठाया। खड़गे ने कहा कि उनके जनसभा को संबोधित करने के बाद मंच पर हवन कर उसे ‘शुद्ध’ किया गया।
सदन के नेता जेपी नड्डा ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने मामले की जांच की बात कही। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने भी कहा कि छुआछूत जैसी किसी भी प्रथा को स्वीकार नहीं किया जा सकता और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के विरोध का असर आखिरी दिन भी नजर आया। विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। कुछ सांसद मंकी टॉय लेकर पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच आमना-सामना भी हुआ। प्रियंका गांधी वाड्रा और सुप्रिया सुले समेत कई विपक्षी सांसद प्रदर्शन में शामिल हुए।
लोकसभा में 96 घंटे से ज्यादा कार्यवाही प्रभावित
मानसून सत्र के दौरान लोकसभा की 19 बैठकें हुईं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सदन की करीब 114 घंटे कार्यवाही होनी थी, लेकिन लोकसभा करीब 17 घंटे 30 मिनट ही चल सकी। इस तरह करीब 96 घंटे 30 मिनट का निर्धारित कार्यवाही समय हंगामे और अन्य कारणों से प्रभावित रहा।
गृह मंत्री अमित शाह ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे पर संसद में चर्चा की पेशकश की थी। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर चर्चा कराने की बात कही। राहुल गांधी ने सरकार के प्रस्ताव पर कहा कि विपक्ष को सरकार का ‘लेक्चर’ नहीं चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार थी और यदि विपक्ष तैयार होता तो सत्र को आगे भी चलाया जा सकता था।


