नई दिल्ली। नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच अब न्यायिक कार्रवाई के अगले चरण में पहुंच गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बुधवार को सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत में गुरुवार से आरोप तय करने को लेकर दलीलें शुरू होने की संभावना है।
यह मामला सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है।
चार्जशीट में 360 गवाह, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्य
सीबीआई ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में मामले को साबित करने के लिए बड़े पैमाने पर साक्ष्य जुटाए हैं। चार्जशीट में 360 गवाह, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्य शामिल किए गए हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक, उच्च शिक्षा विभाग की 12 मई की शिकायत के आधार पर उसी दिन एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की जांच के लिए 72 अधिकारियों-कर्मचारियों और 8 साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीमें गठित की गईं। सीबीआई ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में 92 स्थानों पर छापेमारी कर डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की।
मीडिया में चार्जशीट के हिस्से लीक होने पर कोर्ट नाराज
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि मीडिया में प्रकाशित हो रहे गवाहों के नामों में कुछ नाबालिग भी शामिल हो सकते हैं। एजेंसी ने कहा कि चार्जशीट के कुछ हिस्से लगातार मीडिया में प्रकाशित हो रहे हैं।
इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसी जानकारी, जो अभी अदालत के समक्ष पेश नहीं हुई है और चार्जशीट का हिस्सा है, उसका सार्वजनिक होना गंभीर विषय है। कोर्ट ने जिम्मेदार मीडिया से ऐसी सामग्री प्रकाशित करने से बचने की अपील की।
राजस्थान से शुरू हुई कार्रवाई, मई में 13 आरोपियों तक पहुंची जांच
सीबीआई की कार्रवाई राजस्थान से शुरू हुई। 13 मई को एजेंसी ने मंगीलाल, दिनेश और विकास बिवल को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि उनके मोबाइल फोन से 29 अप्रैल को टेलीग्राम के जरिए लीक प्रश्नपत्र की पीडीएफ मिलने के संकेत मिले।
इसी दिन गुरुग्राम के यश यादव, नासिक के शुभम खैरनार और पुणे के धनंजय लोखंडे को भी गिरफ्तार किया गया। लोखंडे पर सबूत मिटाने के लिए मोबाइल नष्ट करने की कोशिश करने का आरोप है।
इसके बाद 14 मई को पुणे से मनीषा संजय वाघमारे को गिरफ्तार किया गया। सीबीआई के अनुसार, वह पेपर लीक की साजिश में अहम भूमिका निभा रही थीं और उम्मीदवारों तथा विषय विशेषज्ञों के बीच संपर्क सूत्र का काम कर रही थीं।
मनीषा वाघमारे की पूछताछ के बाद 15 मई को लातूर से पीवी कुलकर्णी, 16 मई को पुणे से मनीषा गुरुनाथ मांढरे और 17 मई को लातूर के कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद 22 मई को मनीषा संजय हवालदार और 26 मई को तेजस शाह व डॉ. मनोज शिरुरे की गिरफ्तारी हुई।
डिलीट व्हाट्सएप चैट और लीक पीडीएफ बने अहम सबूत
सीबीआई के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच में डिलीट किए गए व्हाट्सएप चैट और लीक प्रश्नपत्र वाली पीडीएफ फाइलें बरामद हुईं।
जांच एजेंसी ने डिजिटल और संचार उपकरणों के साथ दस्तावेजों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया, जिनके आधार पर पेपर लीक की साजिश से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।
एनटीए विशेषज्ञों पर भी आरोप
सीबीआई के मुताबिक, नीट पेपर लीक मामले में एनटीए से जुड़े तीन विषय विशेषज्ञों की भूमिका सामने आई है। इनमें रसायन विज्ञान के पीवी कुलकर्णी, भौतिकी की मनीषा संजय हवालदार और वनस्पति एवं प्राणि विज्ञान की मनीषा गुरुनाथ मांढरे शामिल हैं। एजेंसी ने इन्हें पेपर लीक के प्रमुख स्रोतों में बताया है।


