नई दिल्ली। NHAI Toll Scam प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के टोल प्लाजा से जुड़ी कथित फर्जी वसूली के मामले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत ईडी ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और कोलकाता में कुल 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
यह मामला टोल वसूली में कथित बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और फर्जी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ लोगों ने NHAI के आधिकारिक सिस्टम के समानांतर एक अलग सॉफ्टवेयर तैयार कर टोल राशि की अवैध वसूली की।
फर्जी सॉफ्टवेयर से 95 फीसदी रकम गायब करने का आरोप
मामले का खुलासा उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) की जांच के दौरान हुआ था। जांच में आरोप सामने आया कि टोल प्लाजा से वसूली गई कुल राशि का केवल करीब पांच प्रतिशत हिस्सा सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता था, जबकि शेष 95 प्रतिशत रकम कथित तौर पर आधिकारिक सिस्टम से बाहर रखकर हड़प ली जाती थी।
ईडी ने इस मामले में दर्ज दो पुलिस एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। जांच एजेंसी अब कथित अपराध से अर्जित रकम के स्रोत, उसके इस्तेमाल और उससे जुड़े लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।
फोरेंसिक जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा
एफआईआर के मुताबिक आरोपियों ने फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए टोल रसीदें तैयार कीं और वास्तविक वसूली को आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर डायवर्ट किया। ईडी की जांच में फोरेंसिक विश्लेषण और NHAI के रिकॉर्ड के आधार पर समानांतर सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं।
ईडी की ताजा कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य कथित फर्जीवाड़े से जुड़े डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाना, संदिग्धों की भूमिका की पहचान करना तथा अपराध से अर्जित धन का पता लगाना है। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।


