बागपत/अगरतला। त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग धनखड़ का निधन उनके परिवार, गांव और पुलिस महकमे के लिए गहरा सदमा लेकर आया है। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिहारीपुर गांव से निकलकर देश के शीर्ष पुलिस अधिकारियों में शामिल हुए अनुराग धनखड़ ने करीब तीन दशक लंबे करियर में सीबीआई, सीआईएसएफ, बीएसएफ और संयुक्त राष्ट्र के कोसोवो शांति मिशन सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
अनुराग धनखड़ मूल रूप से बागपत शहर से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित बिहारीपुर गांव के निवासी थे। करीब एक वर्ष पहले अपने पिता सतपाल धनखड़ के निधन पर वह अंतिम बार गांव आए थे। गांव में उनका पैतृक मकान आज भी मौजूद है, लेकिन परिवार अब वहां नहीं रहता। मकान बंद है और परिवार की कृषि भूमि ईंट-भट्ठे के लिए लीज पर दी गई है।
राजनीतिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाला परिवार
परिवार के सदस्य राजकुमार धनखड़ ने बताया कि करीब पांच वर्ष पहले पूरा परिवार बड़ौत में बस गया था। अनुराग धनखड़ के पिता सतपाल धनखड़ लगातार दो बार ग्राम प्रधान रहे थे। उनके दादा हीरा सिंह धनखड़ सुपरिटेंडेंट जेलर थे, जबकि परिवार के अन्य सदस्य जय सिंह भी जेलर के पद पर कार्यरत रहे। बेटे के निधन की सूचना मिलते ही उनकी मां रगबीरी देवी की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद परिवार त्रिपुरा के लिए रवाना हो गया।
गांव के स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई
अनुराग धनखड़ का बचपन बिहारीपुर गांव में बीता। उन्होंने गांव के प्राथमिक विद्यालय से पांचवीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद सरूरपुर खेड़की इंटर कॉलेज से 12वीं और बड़ौत के जनता वैदिक महाविद्यालय से बीएससी (कृषि) की डिग्री हासिल की।
उनके मित्र रमेश कुमार बताते हैं कि स्कूल के दिनों में अनुराग पढ़ाई के साथ-साथ वॉलीबॉल के बेहतरीन खिलाड़ी भी थे। स्नातक के बाद वह दिल्ली चले गए और वहीं से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की।
बैंक अधिकारी से आईपीएस बनने तक का सफर
अनुराग धनखड़ ने वर्ष 1988 में बैंक में फील्ड ऑफिसर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। नौकरी के साथ उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी जारी रखी और वर्ष 1994 में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए चयनित हुए।
सीबीआई और बड़े मामलों की जांच में निभाई अहम भूमिका
करीब 30 वर्षों के पुलिस सेवा काल में अनुराग धनखड़ ने सीबीआई में पुलिस अधीक्षक, डीआईजी, संयुक्त निदेशक और अतिरिक्त निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक के लगभग 13 हजार करोड़ रुपये के घोटाले और भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े चर्चित मामलों की जांच का नेतृत्व किया।
इसके अलावा उन्होंने सीआईएसएफ में आईजी (पर्सनल) के रूप में सेवाएं दीं तथा 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। बीएसएफ और संयुक्त राष्ट्र के कोसोवो शांति मिशन में उनकी सेवाओं को भी व्यापक सराहना मिली।
परिवार में कौन-कौन हैं
अनुराग धनखड़ अपने पीछे पत्नी कल्पना, बेटे अभिषेक, जो कनाडा में रहते हैं, और दो भाइयों का परिवार छोड़ गए हैं। बड़े भाई विवेक धनखड़ भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त होकर दिल्ली में रहते हैं, जबकि छोटे भाई रविराज धनखड़ बड़ौत में व्यवसाय करते हैं।


