12 अगस्त को खग्रास सूर्य ग्रहण, 28 अगस्त को पूर्ण चंद्र ग्रहण; दोनों भारत में नहीं दिखेंगे
भोपाल। अगस्त 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बेहद खास रहने वाला है। इस महीने महज 15 दिन के अंतर से दो बड़े ग्रहण होने जा रहे हैं। 12 अगस्त को खग्रास सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। दोनों ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देंगे, लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में इनका शानदार नजारा देखा जा सकेगा।
12 अगस्त के पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान उत्तरी रूस से लेकर स्पेन और पुर्तगाल तक कई क्षेत्रों में दिन के समय कुछ देर के लिए रात जैसा अंधेरा छा जाएगा।
27 साल बाद यूरोप में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण
राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू के अनुसार 12 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना है। यूरोप में करीब 27 साल बाद पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। इससे पहले वर्ष 1999 में यूरोप के कुछ हिस्सों में ऐसा नजारा देखने को मिला था।
ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा। जिन क्षेत्रों से ग्रहण की पूर्णता दिखाई देगी, वहां कुछ समय के लिए दिन में ही अंधेरा छा जाएगा।
भारत में ग्रहण होगा, लेकिन सूर्य दिखाई नहीं देगा
भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात करीब 9:04 बजे शुरू होगा। रात 10:28 बजे पूर्ण ग्रहण शुरू होगा और करीब 11:16 बजे यह अपने चरम पर पहुंचेगा। इस समय चंद्रमा सूर्य के सबसे बड़े हिस्से को ढकेगा।
रात 12:05 बजे पूर्ण ग्रहण समाप्त होगा और 13 अगस्त की रात करीब 1:27 बजे ग्रहण पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
हालांकि भारत में उस समय रात होगी। सूर्य पहले ही अस्त हो चुका होगा और देश के अधिकांश हिस्सों में आसमान में सूर्य दिखाई नहीं देगा। इसलिए ग्रहण की खगोलीय घटना अंतरिक्ष में होने के बावजूद इसे भारत से प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा।
रूस से स्पेन-पुर्तगाल तक दिन में अंधेरा
पूर्ण सूर्य ग्रहण का मुख्य मार्ग उत्तरी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और पुर्तगाल से होकर गुजरेगा। इन क्षेत्रों में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा और कुछ समय के लिए दिन में रात जैसा अंधेरा दिखाई देगा।
इसके अलावा यूरोप के बड़े हिस्से, कनाडा और उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा।
सारिका घारू के अनुसार दुनिया की करीब 12 प्रतिशत आबादी इस ग्रहण को प्रत्यक्ष रूप से देख सकेगी। भारत में खगोल प्रेमी नासा और अन्य वैज्ञानिक संस्थाओं की ऑनलाइन लाइव स्ट्रीम के जरिए इस दुर्लभ घटना को देख सकते हैं।
15 दिन में दो ग्रहण को ज्योतिष में माना गया महत्वपूर्ण
ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के ज्योतिषाचार्य एवं भविष्यवक्ता पंडित विनोद गौतम ने अगस्त में होने वाले दोनों ग्रहणों को विश्व परिदृश्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया है।
उनके अनुसार 15 दिन के भीतर दो ग्रहण पड़ना ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता। उन्होंने इसे कुछ प्राकृतिक और मानवीय घटनाओं की आशंका से जोड़ते हुए शोध का विषय बताया है।
उनके मुताबिक 12 अगस्त को श्रावण कृष्ण अमावस्या पर होने वाला खग्रास सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी उत्तरी अमेरिका, ग्रीनलैंड, प्रशांत महासागर, आइसलैंड, अफ्रीका के पश्चिमोत्तर हिस्से, कनाडा के उत्तरी क्षेत्र और रूस समेत कई इलाकों में दिखाई देगा।
28 अगस्त को पूर्ण चंद्र ग्रहण
अगस्त का दूसरा बड़ा ग्रहण 28 अगस्त को श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन होगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, लेकिन भारत में दिखाई नहीं देगा।
ज्योतिष मठ के अनुसार यह ग्रहण एशिया, यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका, ग्रीनलैंड और विभिन्न महासागरीय क्षेत्रों के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा।
भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण की शुरुआत करीब रात 8:04 बजे और मोक्ष करीब 11:22 बजे होगा। कुछ क्षेत्रों में ग्रहण के चरण चंद्रास्त के आसपास दिखाई देंगे।
वैज्ञानिकों के लिए भी महत्वपूर्ण है सूर्य ग्रहण
12 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण सिर्फ आम लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि खगोल वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। पूर्ण ग्रहण के दौरान सूर्य के बाहरी वातावरण यानी कोरोना का अध्ययन करने का अवसर मिलता है।
भारत में प्रत्यक्ष दृश्यता नहीं होने के बावजूद ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए लोग इस दुर्लभ खगोलीय घटना का अनुभव कर सकेंगे।


