सीहोर। सावन मास के अंतिम चरण में प्रदोष के अवसर पर मंगलवार को सीहोर में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सीवन नदी के तट से कुबेरेश्वरधाम तक 11 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा शुरू हुई, जिसमें हजारों शिवभक्त शामिल हुए। कुबेरेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित प्रदीप मिश्रा भी कांवड़ लेकर श्रद्धालुओं के साथ यात्रा में शामिल हुए।
सुबह करीब 9 बजे शिवभक्तों ने सीवन नदी से पवित्र जल कांवड़ में भरा। इसके बाद भगवान कुबेरेश्वर महादेव के अभिषेक के संकल्प के साथ यात्रा शुरू हुई। भगवा ध्वजों, कांवड़ियों की लंबी कतारों और ‘हर-हर महादेव’ व ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से पूरा यात्रा मार्ग शिवमय हो गया।
बारिश में भी नहीं डिगी आस्था
कांवड़ यात्रा शुरू होने के बाद बारिश हुई, लेकिन श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। बरसते पानी के बीच कांवड़िए भगवान शिव का जयकारा लगाते हुए कुबेरेश्वरधाम की ओर बढ़ते रहे। भजन मंडलियों और धार्मिक गीतों ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया।
प्रदीप मिश्रा के साथ हजारों श्रद्धालु
पंडित प्रदीप मिश्रा ने भी सीवन नदी से जल लेकर कांवड़ उठाई और श्रद्धालुओं के साथ पैदल यात्रा शुरू की। उनके साथ बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। प्रदीप मिश्रा के साथ यात्रा में शामिल होने को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आया।
कई राज्यों से पहुंचे शिवभक्त
कांवड़ यात्रा में मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए।
सीवन घाट पर प्रशासन ने की विशेष व्यवस्था
सीवन घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने घाट पर प्रवेश सीमित किया। कांवड़ियों के लिए पुल पर नलों के माध्यम से पवित्र जल भरने की व्यवस्था की गई। पुलिस और प्रशासन की टीमें यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण में जुटी रहीं।
आठ झांकियां बनीं आकर्षण का केंद्र
कांवड़ यात्रा में आठ भव्य झांकियां और भजन मंडलियां भी शामिल हुईं। झांकियों, भजनों और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष के बीच आगे बढ़ती यात्रा ने सीहोर में धार्मिक उत्सव का माहौल बना दिया।
सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक करीब 11 किलोमीटर की यह कांवड़ यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति और समर्पण का प्रतीक बनी हुई है। कांवड़िए पवित्र जल लेकर कुबेरेश्वर महादेव के दरबार पहुंचेंगे और भगवान शिव का अभिषेक करेंगे।


