करोड़ों की संपत्ति, 52 किलो सोना और 11 करोड़ कैश मामले में आरोपी पूर्व परिवहन आरक्षक को राहत
भोपाल। मध्य प्रदेश के चर्चित सौरभ शर्मा मामले में करीब 18 महीने बाद बड़ा अपडेट सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को जमानत दे दी है। कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें भोपाल केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया।
सौरभ शर्मा को 10 हजार रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर राहत मिली है। हालांकि अदालत ने जमानत के साथ कई शर्तें भी लगाई हैं।
हर सुनवाई में रहना होगा मौजूद
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जमानत का मतलब आरोपों से मुक्ति नहीं है। सौरभ शर्मा को ट्रायल कोर्ट में होने वाली प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहना होगा।
इसके अलावा-
- कोर्ट की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।
- किसी गवाह को प्रभावित नहीं कर सकेंगे।
- सबूतों से छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगे।
- अदालत के निर्देशों का पालन करना होगा।
कोर्ट ने माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। ट्रायल शुरू हो गया है। गवाहों और दस्तावेजों की संख्या अधिक होने के कारण मुकदमे के जल्द खत्म होने की संभावना कम है। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं होगा।
सौरभ शर्मा पर कई एजेंसियों की जांच
सौरभ शर्मा के खिलाफ लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू, ईडी, आयकर विभाग और भोपाल पुलिस अलग-अलग मामलों में जांच कर रही हैं।
उन पर परिवहन विभाग में आरक्षक रहते हुए अधिकारियों से कथित सांठगांठ कर अवैध कमाई करने और प्रदेश के विभिन्न परिवहन चेकपोस्ट से निजी लोगों के जरिए रकम वसूलने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
सौरभ शर्मा को फरवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में थे।
अरेरा कॉलोनी से लेकर मेंडोरी तक छापेमारी
लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा के अरेरा कॉलोनी स्थित आवास, निजी स्कूल के कार्यालय और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान करोड़ों रुपए की चल-अचल संपत्ति मिलने की बात सामने आई थी।
इसी जांच के दौरान अरेरा कॉलोनी से एक इनोवा कार मेंडोरी गांव के एक खाली प्लॉट तक पहुंची। सूचना मिलने पर आयकर विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कार की तलाशी ली।
कार से 52 किलोग्राम सोने के बिस्किट और करीब 11 करोड़ रुपए नकद मिलने का मामला सामने आया था।
सोना और कैश किसका? अब तक बना हुआ है सवाल
आयकर विभाग की जांच में दावा किया गया कि कार से बरामद सोना और नकदी का संबंध सौरभ शर्मा से था। इनोवा कार सौरभ की कंपनी में काम करने वाले चेतन के नाम पर दर्ज थी और उसका इस्तेमाल कंपनी के काम में किया जाता था।
हालांकि बरामद सोने और नकदी पर सौरभ शर्मा या उससे जुड़े किसी व्यक्ति की ओर से स्वामित्व का दावा नहीं किए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल बना हुआ है कि यह संपत्ति वास्तव में किसकी थी और इसका स्रोत क्या था।
सोने की जांच में डीआरआई भी शामिल
52 किलो सोने से जुड़े मामले की जांच में डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) भी शामिल है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सोना खरीदने के लिए भुगतान किस तरीके से किया गया और क्या इसमें कस्टम ड्यूटी या विदेशी मुद्रा संबंधी नियमों का उल्लंघन हुआ।
वहीं ईडी इस बात की जांच कर रही है कि कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन का कोई मनी ट्रेल है या नहीं और बरामद संपत्ति वास्तव में किसकी है।
नौकरी के शपथ पत्र को लेकर भी केस
सौरभ शर्मा की मां उमा शर्मा के साथ उनके खिलाफ नौकरी से जुड़े शपथ पत्र को लेकर भी भोपाल पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि शासकीय नौकरी हासिल करने के लिए परिवार के किसी सदस्य के सरकारी सेवा में नहीं होने संबंधी शपथ पत्र दिया गया था।
जमानत मिली, लेकिन जांच और मुकदमा जारी रहेगा
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सौरभ शर्मा जेल से बाहर आ गए हैं, लेकिन उनके खिलाफ चल रहे विभिन्न मामलों की जांच और ट्रायल जारी रहेगा। अदालत ने जमानत देते समय साफ किया है कि यह आदेश आरोपों से बरी किए जाने के बराबर नहीं है।
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 52 किलो सोना, 11 करोड़ रुपए नकद और करोड़ों की कथित संपत्ति का वास्तविक स्रोत क्या था और जांच एजेंसियां अदालत में अपने आरोपों को किस तरह साबित कर पाती हैं।


