भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार में नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी सोमवार को अपने कास्ट सर्टिफिकेट विवाद के मामले में छानबीन समिति के समक्ष पेश होंगी। समिति की बैठक सुबह 11 बजे प्रस्तावित है। सूत्रों के अनुसार, जांच के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले शुरुआती दस्तावेज मंत्री के पक्ष में माने जा रहे हैं, जिससे उन्हें राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है।
जानकारी के मुताबिक, समिति के समक्ष फैमिली ट्री सहित कई अहम दस्तावेज रखे जाएंगे। इन दस्तावेजों में यह उल्लेख किया गया है कि उनके परिवार के सदस्य पहले भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों से विधायक और मंत्री रह चुके हैं। यदि समिति इन दस्तावेजों को पर्याप्त मानते हुए प्रतिमा बागरी को क्लीन चिट देती है, तो वह मोहन सरकार की दूसरी मंत्री होंगी जिन्हें इस मामले में राहत मिलेगी।
इससे पहले राज्यमंत्री गौतम टेटवाल को भी कास्ट सर्टिफिकेट मामले में छानबीन समिति से क्लीन चिट मिल चुकी है। हालांकि, उस निर्णय को बाद में अदालत में चुनौती दी गई। टेटवाल मामले में शिकायतकर्ता की याचिका इंदौर हाईकोर्ट ने स्वीकार कर ली है और अंतिम सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की गई है।
क्या है मामला?
कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया है कि प्रतिमा बागरी ने विधानसभा चुनाव के दौरान जो अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था, वह वैध नहीं है। शिकायत में कहा गया है कि सतना क्षेत्र की अनुसूचित जातियों की आधिकारिक सूची में बागरी समुदाय का नाम शामिल नहीं है। मामला छानबीन समिति तक पहुंचा, लेकिन वहां अंतिम निर्णय नहीं हो सका। इसके बाद शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि प्रतिमा बागरी राजपूत (ठाकुर) समुदाय से संबंध रखती हैं और सामान्य वर्ग से होने के बावजूद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ना नियमों के विरुद्ध है। हाईकोर्ट ने मामले के शीघ्र निपटारे के निर्देश दिए थे। ऐसे में सोमवार को होने वाली छानबीन समिति की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। हालांकि, मामले में अंतिम निर्णय समिति और न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।


